
राजसमंद। जहां कदम-कदम पर ‘श्रीनाथजी’ के जयकारे गूंजते हैं और जहां की हवाओं में भक्ति का वास है, उसी पावन धरा के पास जब पुलिस ने दबिश दी, तो जो मंजर सामने आया उसने सबको हैरान कर दिया। नाथद्वारा की शांत गलियों की आड़ में लोहे को धार दी जा रही थी, लेकिन यह आस्था की नहीं, बल्कि अपराध की तैयारी थी।
उपली ओडन के एक भंगार गोदाम में जब पुलिस दाखिल हुई, तो वहां कबाड़ नहीं बल्कि मौत का सामान सजा था। 9,032 तलवारें—एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हथियारों का मिलना किसी बड़े खतरे की आहट जैसा महसूस होता है। लोहे को पीटकर उन्हें घातक हथियार बनाने वाली मशीनें चीख-चीख कर बता रही थीं कि यहाँ वैल्डिंग की आड़ में वर्षों से कानून की आँखों में धूल झोंकी जा रही थी।
भानसोल रोड के एक बाड़े में चल रहा वह कारखाना, जिसे दुनिया महज एक दुकान समझती थी, वहाँ से भी 196 तलवारें बरामद हुईं। अजय, सोनू और सिकंदर—ये वो नाम हैं जिन्होंने भक्ति की इस नगरी की मर्यादा को ताक पर रखकर अवैध हथियारों का साम्राज्य खड़ा करने की कोशिश की।
पुलिस की इस मुस्तैदी ने एक बहुत बड़ी साजिश या अवैध व्यापार का पर्दाफाश किया है। आज श्रीनाथ कॉलोनी से लेकर रामदासिया बस्ती तक चर्चा सिर्फ इस बात की है कि आखिर इतनी बड़ी तादाद में इन हथियारों का गंतव्य कहाँ था? पुलिस अब इन आरोपियों से सच उगलवाने में जुटी है, ताकि शांति के इस टापू पर फिर कभी हथियारों की ऐसी छाया न पड़े।
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