टेक ज्ञान

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वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर सुविवि में विचारगोष्ठी, साहित्य, संगीत और दर्शन में खोजा आनंद का रहस्य

उदयपुर। विश्व आनंद दिवस (वर्ल्ड हैप्पीनेस डे) के अवसर पर सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग

भाजपा लोकसभा चुनाव के – हरावल दस्ते अर्थात अग्रणी भूमिका वाले कार्यकर्ताओं का किया सम्मान

  उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी के बलिचा स्थित नवीन कार्यालय के सभागार में भाजपा के

राज्य के विद्युत निगमों एवं केन्द्रीय उपक्रमों के मध्य एमओय, ऐतिहासिक समझौतों से राजस्थान बनेगा सरप्लस स्टेट

-पीपीए, राजस्थान के ऊर्जा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगे एमओयू – मुख्यमंत्री भजनलाल

आंतरिक प्रेरणा ही सफलता का सर्वोत्तम साधन हैं : डॉ. दीपक माहेश्वरी

उदयपुर। पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया। यह पंक्ति मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना के अंतर्गत

जेईई मैन परिणाम: एसेंट के विद्यार्थियों का देश में अव्वल परिणाम

उदयपुर। नेशनल टेस्टिंग ऐजेन्सी (एनटीए) द्वारा मंगलवार सुबह जेईई मैन परीक्षा के प्रथम चरण(जनवरी- 2024)

सबके अन्दर एक विशेष योग्यता होती हैं सफलता के लिए उसको निखारना जरूरी हैं : जे.पी. अग्रवाल

उदयपुर। गीतांजली इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्निकल स्टडीज डबोक उदयपुर में एक्सीलेंस आन  द जाॅब पर एक्सपर्ट

डॉ. व्यास को होम साइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा वरिष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार- 2024

उदयपुर। डॉ.रेखा व्यास, एमेरिटस प्रोफ़ेसर, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर को सामुदायिक विज्ञान

राष्ट्रीय ऐलर्जी एंड अस्थमा सम्मेलन में उदयपुर से डॉ. अतुल लुहाडिया पैनल डिस्कशन के लिए चयनित

जयपुर में आयोजित राष्ट्रीय एलर्जी एंड अस्थमा सम्मेलन इकाइकोन -2023 में  गीतांजली मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के श्वास रोग विशेषज्ञ  डॉ.अतुल लुहाडिया को पैनल डिस्कशन के लिए उदयपुर से चुना गया । उन्होंने फेफड़ों की आई.एल.डी. नामक बिमारी हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस पर अपना अनुभव साझा किया एवं भारत के अन्य राज्यों से पधारे हुए विशेषज्ञों के साथ बीमारी पर चर्चा की । डॉ.लुहाडिया ने बताया कि हाइपरसेंसिटिविटी न्यूमोनाइटिस बिमारी का निदान एवं इलाज अगर जल्दी नहीं किया जाए तो ये बिमारी बढ़ सकती है एवं फेफड़ों मे परमानेंट फ़ाइब्रोसिस भी हो सकता है जिसमें मरीज़ के खांसी , सांस के लक्षण बढ़ सकते हैं एवं आगे चलकर शरीर मे ऑक्सीजन की कमी भी हो सकती है । उन्होंने यह भी बताया कि घर मे सिलन, फंगस या कबूतरों के संपर्क मे लंबे समय तक रहने वाले लोगों के अंदर यह बीमारी हो सकती है एवं गंभीर लक्षण भी आ सकते हैं । सम्मेलन मे ही डॉ.लुहाडिया ने एडवांसेस इन एलर्जी एंड अस्थमा सेशन की अध्ययक्षता भी की ।