उदयपुर : अमर शहीद हेमू कालानी का 103वां बलिदान दिवस, गगनभेदी नारों से गूंजा झूलेलाल भवन

 

उदयपुर। श्री झूलेलाल सिंधी सेंट्रल पंचायत के तत्वावधान में शक्ति नगर स्थित झूलेलाल भवन में अमर शहीद हेमू कालानी का 103वां बलिदान दिवस पूर्ण श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस गरिमामय अवसर पर समाज के प्रबुद्धजनों ने शहीद हेमू कालानी की तस्वीर पर माल्यार्पण कर और दीप प्रज्वलित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

वीरता और बलिदान का स्मरण : श्रद्धांजलि सभा के दौरान शहीद हेमू कालानी के अदम्य साहस और देशभक्ति को याद किया गया। वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया:

क्रांतिकारी सफर : 23 मार्च 1923 को सिंध के सखर में जन्मे हेमू कालानी बचपन से ही स्वाधीनता की अलख जगाए हुए थे।

ऐतिहासिक साहस : 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों से भरी ट्रेन को रोकने का साहसिक प्रयास किया, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया।

अंतिम बलिदान : अंग्रेजी हुकूमत की बर्बर यातनाओं के बावजूद उन्होंने अपने साथियों के नाम उजागर नहीं किए और 21 जनवरी 1943 को मात्र 19 वर्ष की अल्पायु में हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया।

देशभक्ति का वातावरण : पूरा परिसर “हेमू कालानी अमर रहें”, “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गुंजायमान रहा। उपस्थित युवाओं के लिए उनका त्याग और राष्ट्रप्रेम आज भी एक प्रेरणापुंज के समान है।

गणमान्य उपस्थिति : इस अवसर पर झूलेलाल सेवा समिति के अध्यक्ष दादा प्रताप राय चुग, जेएसपी अध्यक्ष हरीश राजानी, खानचंद मंगवानी, सुखराम बालचंदानी, हरीश सिधवानी, भारत खत्री, भगवान दास छाबड़ा, किशन वाधवानी, राजेश चुग, उमेश नारा, कैलाश नेभनानी, कमलेश राजानी और अभिषेक कालरा सहित सिंधी समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

 

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