नारायण सेवा संस्थान में सेवा, संवेदना और सम्मान का भावपूर्ण संगम

उदयपुर। नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ लियों का गुड़ा परिसर में रविवार को आयोजित आत्मीय स्नेह मिलन एवं भामाशाह सम्मान समारोह सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम बन गया। देश के विभिन्न राज्यों से आए 150 से अधिक सहयोगियों, शाखा संयोजकों एवं भामाशाहों ने एक परिवार की तरह सहभागिता कर मानव सेवा के इस पावन अभियान को नई ऊर्जा प्रदान की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ संस्थान संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’, निदेशक वंदना अग्रवाल एवं पलक अग्रवाल द्वारा किया गया। वातावरण में सेवा और अपनत्व की भावना साफ झलक रही थी। समारोह के मुख्य अतिथि रमेश चावड़ा रहे, जबकि अध्यक्षता भूपेन्द्र चतुरभाई पटेल ने की।

निदेशक वंदना अग्रवाल ने संस्थान की 40 वर्षों की सेवा यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों दिव्यांगजनों की मुस्कान ही संस्थान की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक लगभग 4.52 लाख दिव्यांग भाई-बहनों को निशुल्क सर्जरी, कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास सेवाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बना चुका है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि अभी भी कई जरूरतमंद दिव्यांग उपचार की आस लगाए बैठे हैं और संस्थान हर संभव प्रयास के साथ उनकी जिंदगी में नई रोशनी लाने के लिए निरंतर कार्यरत है।

इस अवसर पर पलक अग्रवाल ने संस्थान से लाभान्वित दिव्यांग भाई-बहनों की संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायी कहानियां साझा कीं। इन अनुभवों को सुनकर कई अतिथियों की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण भावनाओं से भर उठा।

समारोह में संस्थापक कैलाश ‘मानव’, वंदना अग्रवाल एवं पलक अग्रवाल ने भामाशाहों और सहयोगियों को शॉल, उपरना एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सेवा कार्यों में सहयोग देने वाले इन भामाशाहों के प्रति संस्थान ने गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम का संयोजन महिम जैन ने किया तथा अंत में पलक अग्रवाल ने सभी अतिथियों एवं सहयोगियों का आत्मीय आभार जताया।
आज शाम 7 बजे से रात्रि 9 बजे तक भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रद्धा और भक्ति का माहौल बनेगा। वहीं सोमवार प्रातः सभी अतिथिजन नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर के दर्शन हेतु प्रस्थान करेंगे।

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