राजस्थान राज्यसभा चुनाव : मेवाड़ के कद्दावर नेता डॉ. सीपी जोशी रेस में सबसे आगे, बिना लॉबिंग आलाकमान की बने पहली पसंद, खोड़निया भी दौड़ में शामिल

 

उदयपुर। राजस्थान की 3 राज्यसभा सीटों पर आगामी 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। इस बार कांग्रेस की खाली हो रही एक सीट के लिए पार्टी आलाकमान का पूरा ध्यान मेवाड़ क्षेत्र और वहां के कद्दावर नेताओं पर केंद्रित नजर आ रहा है। चुनावी दौड़ में कई बड़े नाम शामिल हैं, लेकिन पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी अपनी सांगठनिक योग्यता और मेवाड़ में मजबूत पकड़ के चलते रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।

मेवाड़ पर कांग्रेस का विशेष फोकस, स्थानीय चेहरे को तवज्जो

राजस्थान में वर्तमान में कांग्रेस के 5 राज्यसभा सांसदों में से 4 (सोनिया गांधी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक और प्रमोद कुमार तिवारी) बाहरी राज्यों से हैं। केवल नीरज डांगी ही स्थानीय चेहरा हैं, जिनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है।

पार्टी के भीतर इस बात को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है कि इस बार किसी बाहरी के बजाय राजस्थान के ही स्थानीय नेता को मौका दिया जाए। विशेषकर मेवाड़ क्षेत्र में कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से अधिक मजबूत करने के लिए वहां के किसी बड़े और सर्वमान्य चेहरे को दिल्ली भेजने की तैयारी है। पार्टी का मानना है कि मेवाड़ के किसी नेता को बड़ा मंच देने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा और क्षेत्रीय संवेदनाओं को सीधा प्रतिनिधित्व मिलेगा।

डॉ. सीपी जोशी: बिना किसी लॉबिंग के मेरिट पर सबसे मजबूत दावेदार

राजनीतिक हलकों और पार्टी सूत्रों से मिल रही खबरों के अनुसार, डॉ. सीपी जोशी के नाम पर कांग्रेस हाईकमान में बेहद गंभीरता से विचार चल रहा है। जहां अन्य दावेदार दिल्ली में आलाकमान को साधने और लॉबिंग करने में जुटे हैं, वहीं डॉ. जोशी किसी भी प्रकार की गुटबाजी या पैरवी से दूर रहकर विशुद्ध रूप से अपनी योग्यता (मेरिट) के बल पर सबसे मजबूत उम्मीदवार बनकर उभरे हैं।

डॉ. सीपी जोशी की दावेदारी मजबूत होने के मुख्य कारण:

लंबा राजनीतिक अनुभव: डॉ. जोशी केंद्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, सांसद, विधायक और प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के कई बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। उनके पास प्रशासनिक और विधायी कार्यों का लंबा व बेदाग अनुभव है।

मेवाड़ का सबसे बड़ा चेहरा: डॉ. सीपी जोशी को मेवाड़ के क्षेत्र में कांग्रेस का सबसे बड़ा और प्रभावशाली नेता माना जाता है। चूंकि अक्सर चुनावों में मेवाड़ में कांग्रेस की स्थिति उतार-चढ़ाव वाली रहती है, इसलिए उन्हें राज्यसभा भेजना पार्टी के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है।

मेवाड़ से ही जुड़ रहे हैं अन्य दावेदारों के तार

दिलचस्प बात यह है कि रेस में शामिल अन्य नेता भी खुद को मेवाड़ से जोड़कर ही अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं, जिससे यह साफ है कि इस बार चुनाव का केंद्र बिंदु मेवाड़ ही रहने वाला है:

पवन खेड़ा (राष्ट्रीय प्रवक्ता): खुद को रेस में बनाए रखने के लिए पवन खेड़ा राहुल गांधी के जरिए पैरवी कर रहे हैं। वे खुद को मूल रूप से मेवाड़ (उदयपुर) का बता रहे हैं, जहां उनका जन्म हुआ था। हालांकि, उनकी पूरी राजनीति और शिक्षा दिल्ली केंद्रित रही है और वे राजस्थान की स्थानीय राजनीति में कभी सक्रिय नहीं रहे। साल 2022 में टिकट न मिलने पर उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा था— “शायद मेरी तपस्या में कुछ कमी रह गई।”

दिनेश खोड़निया (पूर्व जिला अध्यक्ष, डूंगरपुर): डूंगरपुर के पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश खोड़निया भी मेवाड़ और वागड़ की राजनीति में अपने प्रभाव का दावा करते हुए दावेदारी जता रहे हैं। हालांकि, पेपर लीक मामले में नाम आने और ईडी (ED) की छापेमारी के कारण उनकी स्थिति कमजोर मानी जा रही है।

नीरज डांगी (वर्तमान सांसद): निवर्तमान सांसद नीरज डांगी दोबारा राज्यसभा जाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लगातार संपर्क में हैं और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गुट का समर्थन प्राप्त है।

पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का मानना है कि मेवाड़ में कांग्रेस की स्थिति को सुदृढ़ करने और एक अनुभवी व योग्य नेतृत्व को आगे बढ़ाने के लिए डॉ. सीपी जोशी के नाम पर लगभग सहमति बन सकती है। उनका निर्विवाद व्यक्तित्व और विशाल राजनीतिक कद उन्हें इस रेस में बाकी सभी दावेदारों से बहुत आगे रखता है।

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