कैलिफोर्निया के कोंडोर पक्षियों के संरक्षण में बड़ी सफलता: नई रिसर्च ने ढूँढा ‘गुप्त दुश्मन’ और बचाने की राह हुई आसान

कैलिफोर्निया। लुप्तप्राय कैलिफोर्निया कोंडोर (California Condor) पक्षियों को बचाने के प्रयासों में एक नई उम्मीद जगी है। हाल ही में ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ (Nature Communications) में प्रकाशित एक अध्ययन ने उस पहेली को सुलझा लिया है जो लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी। वैज्ञानिकों ने कोंडोर पक्षियों की रहस्यमयी मौतों के पीछे के ‘अनजान दुश्मन’ का पता लगा लिया है, जिससे अब इन शानदार पक्षियों का भविष्य सुरक्षित करने का रास्ता साफ हो गया है।

कैलिफोर्निया में वन्यजीव प्रेमियों के लिए खुशी की बात यह है कि कोंडोर पक्षियों की आबादी 1987 में महज 26 से बढ़कर अब जंगल में 400 के पार पहुंच चुकी है। हाल ही में उत्तरी कैलिफोर्निया में एक सदी के बाद इस प्रजाति का पहला अंडा भी देखा गया, जो इनकी शानदार वापसी का संकेत है।

क्या था वैज्ञानिकों को परेशान करने वाला ‘गुप्त दुश्मन’?

कैलिफोर्निया ने कोंडोर और अन्य वन्यजीवों को बचाने के लिए साल 2019 में सीसा (Lead) से बने कारतूसों (अम्मुनिशन) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद, वैज्ञानिक इस बात से हैरान थे कि जंगलों में कोंडोर पक्षी सीसे के जहर (Lead Poisoning) का शिकार क्यों हो रहे थे।

इस पहेली को सुलझाने के लिए मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी की पारिस्थितिकी विज्ञानी विक्टोरिया बकर और ‘वेंटाना वाइल्डलाइफ सोसाइटी’ के जीवविज्ञानी जो बर्नेट ने एक कंप्यूटर मॉडल की मदद ली। जांच में दो मुख्य और बेहद सकारात्मक पहलू सामने आए:

  • सफलता का अनोखा पक्ष: पहला कारण यह था कि कोंडोर पक्षी अब पहले से अधिक ‘जंगली’ और आत्मनिर्भर हो रहे हैं। वे इंसानों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्भर रहने के बजाय खुद दूर-दूर तक उड़कर शिकार ढूंढ रहे हैं। हालांकि, इस आत्मनिर्भरता के कारण वे अनजाने में उन क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं जहां शिकारियों द्वारा छोड़े गए अवशेषों में सीसा मौजूद होता है।

  • अवेयरनेस की कमी: शोधकर्ताओं ने पाया कि सेंट्रल कैलिफोर्निया में जंगली सूअरों (Invasive Wild Pigs) की आबादी बढ़ रही है। इन सूअरों को भगाने या नियंत्रित करने के लिए स्थानीय किसान या छोटे शिकारी अक्सर सीसे वाले छर्रों का उपयोग करते हैं। चूंकि यह कोई बड़ा शिकार (Big Game) नहीं है, इसलिए इनमें से कई लोगों को सीसे के कारतूस पर लगे प्रतिबंध की जानकारी ही नहीं थी।

जागरूकता से कम हुई कोंडोर की मौतें

इस रिसर्च का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि जहां भी संस्थाओं ने स्थानीय शिकारियों और जमीन मालिकों के बीच जागरूकता अभियान चलाया और उन्हें ‘लेड-फ्री’ (सीसा-मुक्त) कारतूस बांटे, वहां कोंडोर पक्षियों में जहर फैलने और उनकी मौत की दरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis) से यह भी साबित हुआ है कि 2019 के लेड बैन ने वास्तव में काम किया है। अगर यह प्रतिबंध नहीं होता, तो पक्षियों के अधिक जंगली व्यवहार के कारण मौतों का आंकड़ा कई गुना ज्यादा हो सकता था। यानी, कानून पूरी तरह प्रभावी है, बस इसे और अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत है।

भविष्य की राह: बेहद आसान है समाधान

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि कोंडोर संरक्षण की यह जंग जीतना बेहद आसान है, क्योंकि इसका केवल एक ही बड़ा जोखिम कारक (Risk Factor) है—सीसा। यदि जागरूकता बढ़ाकर इस एक समस्या को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो इन पक्षियों को आसानी से बचाया जा सकता है।

फिलहाल, ‘बीक बॉय’ (Beak Boy) नाम का एक 29 वर्षीय कोंडोर अकेले ही अपने नन्हे चूजे की परवरिश कर रहा है। वैज्ञानिक बेहद आशान्वित हैं कि इस नई रिसर्च के बाद बढ़ने वाली जागरूकता के चलते, यह चूजा एक ऐसी दुनिया में बड़ा होगा जो सीसे के जहर से पूरी तरह मुक्त होगी।

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