
सैयद हबीब, उदयपुर।

अस्सी के दशक में जब दूरदर्शन पर बासु चटर्जी का धारावाहिक ‘रजनी’ प्रसारित होता था, तो पूरा मुल्क टीवी से चिपक जाता था। प्रिया तेंदुलकर द्वारा अभिनीत वह साधारण गृहिणी न कोई सुपरवुमन थी और न ही किसी बड़े ओहदे पर बैठी कोई अफ़सर। वह बस आम इंसान के रोजमर्रा के हकों, पानी के नलों, राशन की कतारों और दफ्तरों के पाखंड से लड़ती थी। लोगों को लगता था कि काश, हमारे मोहल्ले में भी कोई ऐसी ‘रजनी’ होती जो बिना किसी स्वार्थ के हमारे साथ खड़ी हो सके।
उदयपुर के ऐतिहासिक भट्टियानी चौहट्टा ने अपनी उस ‘रजनी’ को हकीकत में जिया था, जिन्हें लोग प्यार और अपनेपन से ‘गीता जीजी’ कहते थे। वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री और पूर्व पार्षद गीता देवी पालीवाल का बुधवार देर रात हुआ निधन केवल एक पूर्व जनप्रतिनिधि का जाना भर नहीं है, बल्कि उस ठेठ मोहल्लेदारी और आत्मीय राजनीति के एक दौर का शांत हो जाना है।
सियासत के समीकरणों को देखें तो भट्टियानी चौहट्टा हमेशा से भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा। उस दौर में जब कांग्रेस के कद्दावर दिग्गज भी चुनावी रण में शिकस्त खा रहे थे, तब नगर परिषद के वार्ड नंबर 10 से गीता देवी ने जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था। वे वहां से पहली और आखिरी बार चुनी जाने वाली कांग्रेस प्रत्याशी बनीं। यह किसी दल की ताकत से ज्यादा एक सीधे-सादे व्यक्तित्व का चमत्कार था।
जब लोगों ने उस जीत की वजहें तलाशीं, तो पता चला कि उनका कोई चुनावी प्रबंधन नहीं था; उनका असली दफ्तर तो इलाके का हर वो घर था जिसकी चौखट पर किसी ने आवाज दी। पेयजल की किल्लत हो या नालियों और सफाई की बदहाली, उम्रदराज होने के बावजूद गीता जीजी बिना वक्त देखे महिलाओं के साथ निकल पड़ती थीं। वे पद पर रहीं या नहीं रहीं, लेकिन उनका दरवाज़ा कभी बंद नहीं हुआ। वे अपने वार्ड की वही असल जिंदगी वाली ‘रजनी’ थीं, जो व्यवस्था की सुस्ती के आगे कभी खामोश नहीं बैठती थीं।
आज जब राजनीति बड़े-बड़े पोस्टरों, बयानों और हिसाब-किताब तक सिमट गई है, गीता देवी जैसी शख्सियत याद दिलाती हैं कि जनसेवा का असली मतलब किसी पद की लालसा नहीं, बल्कि इंसान के सुख-दुख में शरीक होना था। गुरुवार सुबह जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो भट्टियानी चौहट्टा की गलियों में सिर्फ शोक नहीं था, उस अपनेपन का खालीपन भी था जो शायद अब कभी नहीं भरेगा।
अलविदा गीता जीजी, आपकी वह सहज सादगी और मोहल्ले की पहरेदारी हमेशा याद रखी जाएगी।
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