बजरंगबली के आह्वान के साथ गूंजेगी रामधुन : लेकसिटी में आज से वृंदावन के कलाकारों द्वारा जीवंत होगी मर्यादा पुरुषोत्तम की लीला

फोटो एंड रिपोर्ट : कमल कुमावत

 

उदयपुर। झीलों की पावन नगरी उदयपुर में शुक्रवार से भक्ति, श्रद्धा और सनातन आस्था का अनुपम उत्सव शुरू होने जा रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के आदर्शों और जीवन चरित को जन-जन के हृदय में स्थापित करने के उद्देश्य से निम्बार्क मैदान में दस दिवसीय ऐतिहासिक श्रीराम लीला का भव्य शुभारंभ हो रहा है। प्रभु की लीला का आरंभ हर दिन उनके अनन्य भक्त पवनपुत्र हनुमान के आह्वान और हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ के साथ होगा, जिससे पूरा परिसर रामभक्ति के दिव्य भाव से सराबोर रहेगा।

वृंदावन के 40 सिद्धहस्त कलाकार रचेंगे भक्ति रस
उदयपुर के सांस्कृतिक व धार्मिक इतिहास में पहली बार इतने विशाल और भव्य स्तर पर यह आयोजन संपन्न होने जा रहा है। लीला के सजीव मंचन के लिए श्रीकृष्ण की पावन धरा वृंदावन से ‘पुष्टिमार्गीय श्री कृष्ण लीला संस्थान’ का 40 वरिष्ठ व कुशल कलाकारों का दल उदयपुर पहुंच चुका है। संस्थान अध्यक्ष वेदप्रकाश भारद्वाज, दल प्रमुख घनश्याम शर्मा व ज्ञान शर्मा के मार्गदर्शन में कलाकार मंच, प्रकाश, वेशभूषा और ध्वनि व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देकर प्रभु की लीला को साकार करने में जुट गए हैं।

हर समाज तक पहुंचा आमंत्रण, मातृशक्ति संभालेगी पूजन-आरती की बागडोर
श्रीराम लीला समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी व संयोजक डॉ. विजयप्रकाश विप्लवी के नेतृत्व में यह आयोजन सर्वसमाज का उत्सव बन गया है। समिति के प्रतिनिधियों ने सालवी, प्रजापत, वारी, सोनी, साहू, जैन, वैष्णव, गुजराती, पारीख, लोहार और खटीक सहित सभी समाजों की चौखट पर जाकर स्नेह भरा आमंत्रण दिया है। गुरुवार शाम हुई तैयारियों की बैठक में महासचिव भंवरलाल शर्मा ने मातृशक्ति की टोली—प्रियंका भटनागर, रीना परसाई, निशा जैन, रागिनी जैन, नेहा माहुर, रेणुका व्यास, प्रीति शर्मा और हिमानी गौतम को प्रतिदिन के पूजन, आरती और व्यवस्थाओं का पावन दायित्व सौंपा। बुजुर्गों की बैठक व्यवस्था, पेयजल, रोशनी और पार्किंग को लेकर भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

नारद मोह से लेकर राज्याभिषेक तक: 10 दिनों की भावयात्रा
शुक्रवार को प्रथम दिन का शुभारंभ नारद मोह, अवतार प्रयोजन और कथा की पावन पृष्ठभूमि के साथ होगा।

10 अक्टूबर: रावण तपस्या, पृथ्वी पुकार और कौशल्या नंदन श्रीराम का प्राकट्योत्सव।

11 अक्टूबर: महर्षि विश्वामित्र आगमन, ताड़का-सुबाहु वध और पतित-पावनी अहिल्या का उद्धार।

12 अक्टूबर: पुष्प वाटिका प्रसंग और शिव धनुष यज्ञ।

13 अक्टूबर: जनक दुलारी माता सीता और प्रभु राम के विवाह से पूर्व अस्थल आश्रम से निम्बार्क मैदान तक भव्य ‘बिन्दोरी’ (शोभायात्रा) निकलेगी। इसी दिन दशरथ प्रतिज्ञा, कैकेयी कोपभवन और वन गमन का मार्मिक मंचन होगा।

14 अक्टूबर: करुणा से भरा श्रीराम-केवट संवाद, महाराज दशरथ का देवलोकगमन और भरत-मिलाप।

15 अक्टूबर: ऋषि मिलन, गिद्धराज जटायु उद्धार, शूर्पणखा नासिका भंग, खर-दूषण वध और सीता हरण।

16 अक्टूबर: भक्त शबरी से मिलन, सुग्रीव मित्रता, सीता खोज और पवनपुत्र हनुमान द्वारा लंका दहन।

17 अक्टूबर: रामदल का लंका प्रस्थान, विभीषण शरणागति, सेतुबंध रामेश्वरम् स्थापना, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति।

18 अक्टूबर: कुंभकर्ण-मेघनाद-रावण वध, अधर्म पर धर्म की विजय, प्रभु का अयोध्या आगमन और भव्य राज्याभिषेक।

20 अक्टूबर को बुराई पर अच्छाई की विजय: रावण दहन
विजयादशमी के पावन पर्व पर 20 अक्टूबर को शाम 6 बजे सेक्टर-14 नेला स्थित कल्लाजी बावजी चौराहे पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन किया जाएगा। इस दौरान पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा भव्य लोक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर पर्व के उल्लास को चरम पर पहुंचाया जाएगा। लेकसिटी अब अगले दस दिनों तक पूरी तरह राममय होकर भक्ति के रस में गोते लगाने के लिए तैयार है।

 

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