उदयपुर कलेक्ट्रेट पर दोतरफा संग्राम : न्याय की चौखट पर अड़े वकील तो जहरीले धुएं के खिलाफ सड़कों पर उतरे आईआईएम व दीनदयाल नगर के बाशिंदे

झीलों की नगरी से एक विशेष रिपोर्ट

न्याय, व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता जब फाइलों में सिमट जाती है, तो हुकूमत की देहरी पर विरोध के सुर गूंजने लगते हैं। सोमवार को उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर कुछ ऐसे ही दोहरे जनाक्रोश का गवाह बना। एक तरफ कानून की पैरवी करने वाले काले कोट के पहरुए खाकी की कथित मनमानी और भूमाफिया को शह देने के खिलाफ सुंदरकांड का पाठ कर अनिश्चितकालीन धरने पर डटे रहे, तो दूसरी तरफ सांसों पर मंडराते जहरीले धुएं के खिलाफ बलीचा डंपिंग यार्ड से सटे दीनदयाल नगर के सैकड़ों बाशिंदे और देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईएम (IIM) उदयपुर के लोग कलेक्ट्रेट व नगर निगम के बाहर गुहार लगाते नजर आए।

मोर्चा 1: कलेक्ट्रेट में रात बिताने के लिए मंगवाए बिस्तर, सवीना CI को हटाने पर अड़े वकील
रविवार को सवीना थाने के तीन घंटे के घेराव के बाद सोमवार को वकीलों का आक्रोश सीधे जिला कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय के नीचे पहुंच गया। वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी की और पुलिस को ‘सद्बुद्धि’ देने के लिए दरियां बिछाकर सुंदरकांड का सामूहिक पाठ किया।

कलेक्ट्रेट में ही रात बिताने का ऐलान: दिनभर चले प्रदर्शन के बावजूद शाम तक जब एसपी स्तर से थानाधिकारी पर कार्रवाई का आदेश नहीं आया, तो वकीलों ने धरना जारी रखते हुए मौके पर ही रात बिताने के लिए बिस्तर मंगवा लिए। वकीलों ने दो-टूक कहा कि जब तक सीआई पर गाज नहीं गिरेगी, वे यहां से एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।

चार थानों का जाब्ता और दो डीएसपी तैनात: बार एसोसिएशन अध्यक्ष जितेंद्र जैन, पूर्व अध्यक्ष भरत जोशी, राकेश मोगरा सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने कलेक्ट्रेट को छावनी बना दिया। डीएसपी छवि शर्मा और डीएसपी रविंद्र चारण के नेतृत्व में चार थानों का भारी पुलिस बल तैनात रहा।

विवाद की पृष्ठभूमि: बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव चेतनपुरी गोस्वामी ने आरोप लगाया कि साथी वकील राजेश जाजोदिया के रिश्तेदार देवेंद्र अग्रवाल के गोविंद नगर स्थित प्लॉट पर भूमाफिया कौशल आमेटा ने अवैध कब्जे की नीयत से पथराव किया और थाने में ही वकील को जान से मारने की धमकी दी। इसके बावजूद सवीना सीआई दलबीर सिंह ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे स्पष्ट है कि क्षेत्र में भूमाफिया को संरक्षण मिल रहा है।

मोर्चा 2: ‘हमारी जान से क्यों खेल रहा नगर निगम?’; बलीचा डंपिंग यार्ड के जहरीले धुएं पर फूटा आक्रोश
कलेक्ट्रेट में जहां एक ओर खाकी के रवैये के खिलाफ नारेबाजी चल रही थी, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सांसों के हक के लिए महिलाएं, बुजुर्ग और आईआईएम के शोधार्थी प्रदर्शन कर रहे थे। बलीचा स्थित डंपिंग यार्ड से महज 100 मीटर की दूरी पर बसे पंडित दीनदयाल नगर के करीब 350 परिवार और पास ही स्थित आईआईएम उदयपुर का पूरा कैंपस यार्ड में जलने वाले कचरे के दमघोंटू धुएं से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

अवैध रूप से जलाया जा रहा कचरा: प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम और जिला प्रशासन के खिलाफ रोष जताते हुए कहा कि कचरा प्रबंधन के नाम पर खुलेआम कचरे में आग लगाई जा रही है, जिससे निकलने वाला जहरीला धुआं घरों में घुस रहा है। हवा चलने पर कचरा उड़कर रिहायशी छतों और आंगनों में गिरता है।

‘प्रशासनिक परिसर में हो रहा गैर-कानूनी काम’: प्रदर्शन में शामिल आईआईएम उदयपुर की प्रज्ञा ने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि खुले में कचरा जलाना पूरी तरह गैर-कानूनी है और यह अपराध सरकारी निगरानी वाले परिसर में हो रहा है। मासूम बच्चे इस जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं और बुजुर्ग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। बार-बार केवल खोखले आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर समाधान शून्य है।

प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा
एक ही दिन में न्याय के रक्षकों का सड़क पर उतरना और दूसरी ओर सांसों के अधिकार के लिए संभ्रांत परिवारों व प्रबुद्ध शोधार्थियों का सिस्टम की चौखट खटखटाना, यह स्पष्ट संकेत देता है कि शहर की प्रशासनिक मशीनरी को अब कागजी बैठकों से बाहर निकलकर त्वरित और ठोस फैसले लेने होंगे। कलेक्ट्रेट के गलियारों में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन वकीलों के आक्रोश को कैसे शांत करता है और बलीचा के नागरिकों को इस जहरीले धुएं से कब मुक्ति दिलाता है।

 

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