उदयपुर। न्याय की चौखट पर जब दलीलें दी जाती हैं, तो हुकूमतें भी गौर से सुनती हैं। लेकिन जब कानून के रखवालों की दहलीज पर ही कानून के पहरुओं की सुरक्षा तार-तार होने लगे, तो फिर अदालती फाइलों की जगह थाने के फर्श पर धरने सजते हैं। झीलों की नगरी उदयपुर के सवीना थाने में रविवार दोपहर से रात तक जो मंजर दिखा, वह महकमे की कार्यशैली पर गहरे और चुभते हुए सवाल खड़े कर गया। खाकी की पेशानी पर बल तब पड़े जब काले कोट वालों ने सीधे थानेदार को हटाने का बिगुल फूंक दिया।
विवाद की चिंगारी एडवोकेट राजेश जाजोदिया और उनके रिश्तेदार देवेंद्र अग्रवाल के गोविंद नगर स्थित भूखंड से जुड़ी है। आरोप है कि भूमाफिया की नीयत जमीन को हड़पने की थी। रविवार को जब प्लॉट पर सफाई चल रही थी, तभी कौशल आमेटा ने वकील और भूखंड मालिक पर पथराव कर दिया। लहूलुहान व्यवस्था की गुहार लगाने जब वकील राजेश जाजोदिया सवीना थाने पहुंचे, तो खाकी की मौजूदगी में ही आरोपी कौशल आमेटा वहां जा धमका।
आरोप है कि पुलिसकर्मियों के सामने ही आरोपी ने वकील को सरेआम जान से मारने की धमकी दे डाली। हद तो तब हो गई जब खाकी की आंखों के सामने यह सब होने के बावजूद तत्काल कोई ठोस कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया। यह बात वकीलों के स्वाभिमान पर सीधे हमले जैसी थी। खबर शहर भर के वकीलों में आग की तरह फैली और देखते ही देखते वकीलों का हुजूम सवीना थाने में दाखिल होकर धरने पर बैठ गया। मांग एक ही थी—थानाधिकारी (सीआई) दलबीर सिंह को तत्काल पद से हटाया जाए।
‘थानेदार की ढिलाई से फल-फूल रहे भूमाफिया’ : चेतनपुरी गोस्वामी का सीधा हमला
बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव चेतनपुरी गोस्वामी ने खुलकर पुलिसिया रवैये पर उंगली उठाई। उन्होंने दो-टूक कहा कि थानेदार की लापरवाही और ढुलमुल रवैये के चलते ही शहर में भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं। अगर थाने में पुलिस के सामने एक वकील को जान से मारने की धमकी दी जा सकती है, तो आम शहरी की हिफाजत का क्या भरोसा? वकीलों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक सीआई दलबीर सिंह को लाइन हाजिर कर थाने से नहीं हटाया जाता, संघर्ष थमेगा नहीं।
तीन घंटे तक थाने में चला मंथन, आला अफसरों ने संभाला मोर्चा
थाने में बढ़ते भारी तनाव और वकीलों के सख्त रुख को भांपते हुए एडिशनल एसपी उमेश ओझा और डीएसपी छवि शर्मा भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। थाने के भीतर वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहसें और समझाइश का दौर चला। करीब तीन घंटे तक चले गतिरोध के बाद रात करीब 9 बजे जाकर वकीलों का गुस्सा थोड़ा शांत हुआ।
एएसपी उमेश ओझा ने वकीलों की ओर से सीआई दलबीर सिंह के खिलाफ दी गई लिखित शिकायत को स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि यह पूरा प्रकरण जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. अमृता दुहन के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और पूरे मामले में एसपी स्तर से ही आवश्यक संज्ञान व निर्णय लिया जाएगा।
सीआई की अपनी दलील : ‘हमने तो त्वरित कार्रवाई की’
दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए सीआई दलबीर सिंह का पक्ष अलग कहानी बयां कर रहा है। उनका कहना था कि गोविंद नगर स्थित प्लॉट पर शनिवार को तोड़फोड़ की सूचना मिली थी, जिस पर दोनों पक्षों—राजेश जाजोदिया और कौशल आमेटा—ने परस्पर परिवाद दिए थे। थाने में दोनों पक्षों के बीच कहासुनी जरूर हुई, लेकिन पुलिस आरोपी आमेटा की धरपकड़ के प्रयास में जुटी हुई थी। सीआई के अनुसार, विवादित जमीन पर दोनों तरफ से पथराव हुआ था, जिसमें कौशल आमेटा और एक वकील दोनों घायल हुए थे, जिन्हें पुलिस ने ही तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
बहरहाल, सवीना थाने की यह तल्खी एक बार फिर इस कड़वे सच को उजागर कर गई कि जब तक खाकी अपनी निष्पक्षता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती, तब तक न्याय के गलियारों से उठने वाली नाराजगी यूं ही थानों की देहरी पर टकराती रहेगी।
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