उदयपुर के गीतांजलि हॉस्पिटल में दुर्लभ सर्जरी: 65 वर्षीय मरीज की छाती में पहुंचे पेट व बड़ी आंत को सुरक्षित निकाला; डॉ. हेमंत जैन व टीम को मिली सफलता

उदयपुर। गीतांजलि हॉस्पिटल, उदयपुर के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग में डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र की एक अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा स्थिति का सामना कर रहे 65 वर्षीय बुजुर्ग का सफल ऑपरेशन किया है। मरीज का पूरा आमाशय (पेट) और बड़ी आंत छाती के भीतर चले गए थे, जिसके कारण बायां फेफड़ा दब गया था और हृदय पर भी गंभीर दबाव बन रहा था।

गैस्ट्रो एवं लिवर सर्जन डॉ. हेमंत जैन के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने लैप्रोस्कोपिक-असिस्टेड तकनीक से ऑपरेशन कर पेट के अंगों को वापस सही स्थान पर पहुंचाया और डायफ्राम के छेद को सफलतापूर्वक ठीक किया।

डायफ्रैग्मैटिक हर्निया के साथ पेट में ट्विस्ट (गैस्ट्रिक वॉल्वुलस)
मरीज गंभीर सांस फूलने, ऑक्सीजन की अत्यधिक आवश्यकता, खाना न खा पाने और लगातार उल्टियों की गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचा था। चिकित्सकीय जांच में सामने आया कि मरीज डायफ्रैग्मैटिक हर्निया (Diaphragmatic Hernia) के साथ गैस्ट्रिक वॉल्वुलस (Gastric Volvulus) से पीड़ित था।

क्या है यह स्थिति: छाती और पेट के बीच की मांसपेशी (डायफ्राम) में असामान्य छिद्र होने के कारण पेट के अंदरूनी अंग खिसककर छाती में प्रवेश कर गए थे।

अंगों पर गंभीर असर: मरीज का पूरा आमाशय और बड़ी आंत बाईं छाती में पहुंच गए थे। इससे बायां फेफड़ा पूरी तरह दब चुका था, हृदय पर भारी दबाव था और पेट अपनी प्राकृतिक धुरी से घूम (ट्विस्ट हो) गया था।

चुनौतीपूर्ण सर्जरी और विशेष एनेस्थीसिया प्रबंधन
मरीज की 65 वर्ष की आयु, श्वसन तंत्र की गंभीर विफलता, ऑक्सीजन पर पूर्ण निर्भरता और छाती में संक्रमण के कारण यह ऑपरेशन अत्यधिक जोखिम भरा था:

सर्जिकल प्रक्रिया: डॉ. हेमंत जैन और उनकी टीम ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक-असिस्टेड तकनीक के जरिए छाती में पहुंचे पेट और बड़ी आंत को नीचे खींचकर उदर गुहा (पेट) में पुनः स्थापित किया और डायफ्राम के छिद्र की मरम्मत की।

एनेस्थीसिया टीम का समन्वय: मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अनुश जैन व उनकी टीम ने विशेष एनेस्थीसिया प्रोटोकॉल लागू किया, जिससे सर्जरी बिना किसी व्यवधान के पूरी हो सकी।

त्वरित रिकवरी: इस जटिल और बड़ी सर्जरी के बाद भी मरीज की रिकवरी इतनी बेहतर रही कि उसे पोस्ट-ऑपरेटिव आईसीयू (ICU) में रखने की आवश्यकता नहीं पड़ी और सामान्य वार्ड में ही स्वास्थ्य लाभ हुआ।

समय पर निदान और विशेषज्ञता जरूरी
डॉ. हेमंत जैन ने बताया कि डायफ्रैग्मैटिक हर्निया के साथ गैस्ट्रिक वॉल्वुलस अत्यंत गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसमें समय पर सटीक डायग्नोसिस और विशेषज्ञ सर्जिकल टीम का होना जीवन रक्षक साबित होता है।

 

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