वॉशिंगटन/भटकल।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 2026 में मिशिगन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार डॉ. अब्दुल अल-सैयद ने सीनेट चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। वे अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) में पहुँचने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। पेशे से डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञ (Epidemiologist) अल-सैयद ने कड़े मुकाबले में 50 फीसदी से अधिक वोट हासिल कर अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोज़र्स (करीब 45% वोट) को शिकस्त दी।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत के कर्नाटक राज्य के तटीय शहर भटकल (उत्तर कन्नड़ जिला) में भी जश्न का माहौल है, जहाँ से अब्दुल अल-सैयद का गहरा पारिवारिक और वैवाहिक रिश्ता जुड़ा हुआ है।
कर्नाटक के स्वतंत्रता सेनानी व मंत्री परिवार से वैवाहिक रिश्ता
डॉ. अब्दुल अल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू का ताल्लुक कर्नाटक के एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक राजनीतिक परिवार से है:
भटकल में बिजली लाने वाले दादा: डॉ. सारा के दादा जुकाकू शमशुद्दीन भटकल क्षेत्र के पहले वकील थे। उन्होंने ही भटकल में पहली बार बिजली पहुँचाने की ऐतिहासिक पहल की थी। बाद में वे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती (1958-1962) के मंत्रिमंडल में उपमंत्री रहे।
शिक्षा व राजनीति में योगदान: डॉ. सारा के एक अन्य करीबी रिश्तेदार एस.एम. याह्या भी वकील और कर्नाटक की देवराज उर्स सरकार (1970 के दशक) में वरिष्ठ एवं निष्पक्ष छवि के मंत्री रहे, जिन्होंने तटीय कर्नाटक में उच्च शिक्षा के विस्तार में अहम भूमिका निभाई।
संस्थापक विरासत: डॉ. सारा के परनाना एम.एम. सिद्दीकी ने भटकल में ‘अंजुमन हामी-ए-मुस्लिमीन’ की नींव रखी थी, जिसके तहत आज नर्सरी से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज तक संचालित होते हैं।
‘अरब होने से ज़्यादा भारतीय हूँ’: पारिवारिक जुड़ाव
चुनाव प्रचार के दौरान खुद पर हुए हमलों का जवाब देते हुए अल-सैयद ने अपने भारतीय रिश्ते को खुलकर बयां किया था। उन्होंने कहा था:
“मेरी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुई है और इसे 20 साल हो चुके हैं। मैं इस परिवार में पूरी तरह घुल-मिल गया हूँ। हो सकता है कि मैं अरब होने से ज़्यादा भारतीय हूँ।”
भटकल निवासी उनकी रिश्तेदार और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आलिया नाज़नीन जुकाकू ने बताया कि अल-सैयद बेंगलुरु और भटकल आ चुके हैं, वे स्थानीय भटकली भाषा के कई शब्द समझते व बोलते हैं और बेहद मिलनसार व मानवीय अधिकारों के लिए समर्पित व्यक्ति हैं।
सफर: रोड्स स्कॉलर से अमेरिकी सीनेट तक
शिक्षा व करियर: डॉ. सारा और अब्दुल अल-सैयद की पहली मुलाकात मिशिगन यूनिवर्सिटी में हुई थी, जहाँ दोनों रोड्स स्कॉलर (Rhodes Scholars) थे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल व एपिडेमियोलॉजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2015 में डेट्रॉइट स्वास्थ्य विभाग के सबसे युवा कार्यकारी निदेशक बनकर वे राष्ट्रीय सुर्खियों में आए थे।
चुनावी मुद्दे: अल-सैयद ने प्रगतिशील मुद्दों पर चुनाव लड़ा, जिसमें अरबपतियों पर टैक्स लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना, नागरिक व एलजीबीटीक्यू अधिकार और संतुलित विदेश नीति शामिल रहे। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं ने उनके पक्ष में प्रचार किया था।
अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स का बहुमत
मध्यावधि चुनाव के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है:
सीनेट (उच्च सदन): डेमोक्रेटिक पार्टी ने 54 सीटों पर कब्जा कर लिया है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी 44 सीटों पर सिमट गई है।
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन): डेमोक्रेट्स ने बहुमत के जादुई आंकड़े (218) को पार करते हुए 228 सीटों पर जीत दर्ज कर ली है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के खाते में अब तक 139 सीटें आई हैं।
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