अण बोली उघापन: पुला में श्रद्धा और उल्लास के साथ निकली भव्य गज यात्रा, 30 जोड़ों के संकल्प और शिव-पार्वती की आराधना से महका प्रांगण

फोटो एंड रिपोर्ट : कमल कुमावत

उदयपुर: झीलों की पावन नगरी उदयपुर में सनातन परंपरा, लोक आस्था और मातृशक्ति के अटूट संकल्प का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिला। श्री क्षत्रिय कुमावत विकास संस्थान एवं मातृशक्ति के तत्वावधान में शनिवार, 10 अक्टूबर को ‘अण बोली उघापन’ का सामूहिक महाअनुष्ठान अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ प्रारंभ हुआ। व्रत की पूर्णता और ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के इस पावन पर्व पर जब पुला क्षेत्र में भव्य गज यात्रा निकली, तो पूरा माहौल धर्ममय और मांगलिक जयकारों से गूंज उठा।

पुला में धर्मराज मंदिर से निकली भव्य गज यात्रा, देव दर्शन करते आगे बढ़ा कारवां संस्थान के अध्यक्ष योगेश कुमावत एवं महामंत्री सुधीर कुमावत ने बताया कि अण बोली व्रत के सामूहिक उघापन के उपलक्ष्य में गज (हाथी) के पावन प्रतीक का विधिवत निर्माण कराया गया। इसके पश्चात पुला स्थित श्री धर्मराज मंदिर से भव्य गज यात्रा का शुभारंभ हुआ। श्रद्धा और उल्लास से सराबोर यह यात्रा धर्मराज मंदिर से चारभुजा जी मंदिर और शिव मंदिर होते हुए पूरे पुला गांव में भ्रमण कर आगे बढ़ी। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर गज यात्रा का स्वागत किया और मंगल कामनाएं कीं।

मंडले में स्थापित हुए गज, रातभर शिव-पार्वती की आराधना और हवन की आहुतियां पुला गांव से भ्रमण करते हुए यह शोभायात्रा ऑकेजन गार्डन पहुंची, जहां विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आकर्षक मंडले में गज की स्थापना की गई। संस्थान पदाधिकारियों ने बताया कि इस दिव्य अवसर पर 30 भाग्यशाली जोड़ों का सामूहिक उघापन संपन्न हो रहा है। पूरी रात श्रद्धालु माता पार्वती, भगवान भोलेनाथ और गज की विशेष पूजा-अर्चना, व्रत कथा के श्रवण और पवित्र हवन में आहुतियां देकर अपने संकल्प को पूर्णता प्रदान कर रहे हैं। रविवार सवेरे शुभ मुहूर्त में महाहवन की पूर्णाहुति होगी, जिसके पश्चात गज के पावन प्रतीक का विसर्जन फतहसागर झील में श्रद्धापूर्वक किया जाएगा।

मातृशक्ति और समाजजनों का जुटा स्नेह, 3000 श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी मीडिया प्रभारी कमल कुमावत ने जानकारी दी कि आस्था के इस महापर्व में समाजजनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। अनुष्ठान में मुकेश गोठवाल, खुशवेंद्र रेणा, पंकज अजमेरा, पंकज झालवार, रवि टांक के साथ-साथ मातृशक्ति की टोली—रेणु, सरोज, सीमा, चंदा, गीता देवी, खुश्बू, नेहा सहित बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं और गणमान्य जन उपस्थित रहे।

संस्थान द्वारा इस सामूहिक उघापन के उपलक्ष्य में रविवार को विशाल महाप्रसादी का आयोजन भी रखा गया है, जिसमें 3,000 से अधिक श्रद्धालु और समाजजन एक साथ बैठकर भगवान का भोग व प्रसादी ग्रहण करेंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक अनुष्ठान के रूप में, बल्कि समाज के आपसी प्रेम, संगठन और सनातन संस्कारों के सुंदर मिलन के रूप में जीवंत हो उठा है।

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