
अदालत में स्वयं महादेव बने पक्षकार; ईटीएस मशीन और ड्रोन कैमरों से हुई हाईटेक वैज्ञानिक पैमाइश, अब कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट पर टिकीं शहर की निगाहें
उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर में आस्था के प्रमुख केंद्र महाकालेश्वर महादेव मंदिर की बेशकीमती भूमि को लेकर दशकों पुराना विवाद अब आधुनिक तकनीक और कानूनी चौखट के निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। न्यायालय के 24 जुलाई के आदेश की अनुपालना में सोमवार को प्रशासनिक अमले और कोर्ट कमिश्नर की मौजूदगी में मंदिर भूमि की वैज्ञानिक पैमाइश करवाई गई। इस कानूनी लड़ाई की सबसे अनूठी और आध्यात्मिक बात यह है कि अदालत में चल रहे इस वाद में स्वयं महाकालेश्वर महादेव को पक्षकार बनाया गया है।
एक ओर जहां भगवान शिव के प्रति शहरवासियों की अगाध आस्था जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर मंदिर की जमीन पर मालिकाना हक और कथित अतिक्रमण को लेकर विवाद गहराया हुआ है।
1954 के ऐतिहासिक दस्तावेज बनाम 2026 की धरातलीय हकीकत
विवाद की जड़ें 72 साल पुराने राजस्व दस्तावेजों से जुड़ी हैं:
1954 का फैसला: अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, 13 दिसंबर 1954 को एडिशनल सेटलमेंट कमिश्नर (जयपुर) ने कोट और बाड़ से घिरी बिलानाम/पड़त भूमि को महाकालेश्वर महादेव की भूमि घोषित किया था।
1975 की पुष्टि: मंदिर पक्ष का दावा है कि राजस्व मंडल (अजमेर) ने भी 30 मई 1975 को इस निर्णय की आधिकारिक पुष्टि की थी।
2026 में तकनीकी मिलान: अब 1954 के उन्हीं ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के आधार पर साविक आराजी 5 और वर्तमान आराजी 42 की वास्तविक सीमाओं, क्षेत्रफल और मौके की भौतिक स्थिति का मिलान किया जा रहा है।
आसमान से ड्रोन और जमीन पर ETS मशीन से नपी जमीन
मंदिर भूमि पर किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को चिह्नित करने और दूध का दूध, पानी का पानी करने के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक विधियों का सहारा लिया गया:
इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (ETS): ईटीएस मशीन के जरिए जमीन की एक-एक इंच सीमा का सटीक डिजिटल मापन किया गया।
ड्रोन मैपिंग व वीडियोग्राफी: पूरे परिसर और आसपास के क्षेत्र की ड्रोन फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी करवाई गई ताकि राजस्व नक्शों का मौके की वास्तविक स्थिति से तुलनात्मक मिलान किया जा सके।
कोर्ट कमिश्नर सौंपेंगे विस्तृत रिपोर्ट, इन पक्षों के बीच कानूनी जंग
कोर्ट कमिश्नर राजेश कुमार उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि पैमाइश और निरीक्षण का तुलनात्मक ब्योरा जल्द ही अदालत में पेश किया जाएगा, जिसमें 1954-1975 के राजस्व रिकॉर्ड, मौके का वास्तविक रकबा और ड्रोन फुटेज शामिल होंगे।
पैमाइश की मांग करने वाला पक्ष: प्रदीप आमेटा, देवेंद्र पाल सिंह और कैलाश चंद्र गायरी।
विपक्षी पक्षकार: जिला कलेक्टर, तहसीलदार (गिर्वा), सार्वजनिक प्रन्यास मंदिर अध्यक्ष तेज सिंह सरूपरिया और सचिव चंद्रशेखर दाधीच।
मौके पर मौजूद प्रशासनिक अमला: पैमाइश के दौरान अतिरिक्त भू-प्रबंध अधिकारी लतिका पालीवाल, गिर्वा तहसीलदार गणेश कुमार विजयवर्गीय, भू-अभिलेख निरीक्षक सुरपाल सिंह सोलंकी (शहर), संगीता सोनी (भुवाणा), पटवारी प्रवीण मेनारिया (शोभागपुरा) तथा पटवारी चित्रलेखा सालवी (शहर), एडवोकेट अशोक सिंघवी उपस्थित रहे।
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