
बीजिंग। चीन सरकार ने देश में गिरती जन्म दर को बढ़ाने के उद्देश्य से कंडोम और अन्य गर्भनिरोधक साधनों पर 13 प्रतिशत बिक्री कर (VAT) लगा दिया है। यह नई व्यवस्था 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुकी है। वहीं, बच्चों की देखभाल और शादी से जुड़ी सेवाओं को टैक्स से छूट दी गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों को परिवार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने की नीति का हिस्सा है।

हालांकि इस फैसले को लेकर आम जनता और विशेषज्ञों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर लोग इसका मज़ाक उड़ा रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ इसे अव्यावहारिक और संभावित रूप से नुकसानदेह बता रहे हैं।
जन्म दर में लगातार गिरावट
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चीन की जनसंख्या लगातार तीसरे साल घटी है। साल 2024 में देश में एक करोड़ से भी कम बच्चों का जन्म हुआ, जो एक दशक पहले की तुलना में लगभग आधा है। चीन पहले ही बुजुर्ग आबादी, आर्थिक सुस्ती और घटते श्रमबल जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।
लोगों की प्रतिक्रिया
कई लोगों का कहना है कि कंडोम महंगे होने से कोई बच्चा पैदा करने का फैसला नहीं करता। सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने लिखा,
“मैं अभी से ज़िंदगी भर का कंडोम खरीद लूंगा।”
कुछ लोगों का मानना है कि इससे अनचाहे गर्भ और यौन रोगों का खतरा बढ़ सकता है, खासकर युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में।
विशेषज्ञों की चिंता
जनसांख्यिकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति केवल “प्रतीकात्मक” है। विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ यी फुक्सियन के अनुसार,
“कंडोम पर टैक्स बढ़ाने से जन्म दर बढ़ेगी, यह सोचना अतिशयोक्ति है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि असली समस्या बच्चों की परवरिश की ऊँची लागत, शिक्षा का दबाव, नौकरी की अनिश्चितता और महिलाओं पर बढ़ता सामाजिक बोझ है।
सरकारी हस्तक्षेप पर सवाल
कुछ प्रांतों में महिलाओं को फोन कर उनके मासिक धर्म और गर्भधारण की योजनाओं के बारे में पूछे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। इससे सरकार पर निजी जीवन में ज़रूरत से ज़्यादा दखल देने के आरोप लगे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर लोगों को लगे कि सरकार निजी फैसलों में ज़बरदस्ती दखल दे रही है, तो इसका असर उल्टा भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल टैक्स नीति बदलकर जन्म दर नहीं बढ़ाई जा सकती। इसके लिए ज़रूरी है कि सरकार युवाओं को आर्थिक सुरक्षा, बेहतर कार्य-जीवन संतुलन और भरोसेमंद सामाजिक ढांचा दे। वरना यह कदम जनसंख्या बढ़ाने के बजाय असंतोष ही बढ़ाएगा।
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