
उदयपुर। मेवाड़ की प्रतिष्ठित और जैन समाज की अग्रणी संस्था ‘ओसवाल सभा’ के त्रिवार्षिक चुनाव रविवार को केवल एक मतदान प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रतिबिंब बनकर उभरे। भुवाणा स्थित आचार्य महाप्रज्ञ विहार में सुबह से शाम तक चली इस प्रक्रिया में समाज के 9400 पंजीकृत मतदाताओं में से 4550 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह चुनाव न केवल नेतृत्व चुनने का माध्यम रहा, बल्कि समाज की बदलती वैचारिक दिशा को भी रेखांकित कर गया।
इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र अध्यक्ष पद रहा, जहां निवर्तमान अध्यक्ष प्रकाश कोठारी और संजय भंडारी के बीच कांटे की टक्कर देखी गई। राजनीतिक दृष्टिकोण से यह मुकाबला ‘अनुभव बनाम विकल्प’ का रहा। जहां एक पक्ष पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों के भरोसे मैदान में था, वहीं दूसरा पक्ष नई कार्ययोजना और सुधारों के वादे के साथ मतदाताओं को अपनी ओर खींचता दिखा। देर रात तक चलने वाली मतगणना यह तय करेगी कि समाज यथास्थिति को चुनता है या नेतृत्व में बदलाव का स्वागत करता है।
इस बार के चुनाव में सबसे सुखद और विश्लेषणात्मक पहलू महिलाओं की भागीदारी रही। 50 कार्य परिषद सदस्यों के चुनाव में 15 महिला उम्मीदवारों की मौजूदगी यह स्पष्ट करती है कि अब समाज के नीतिगत निर्णयों में महिलाओं की भूमिका केवल औपचारिक नहीं बल्कि निर्णायक होने वाली है।
साथ ही, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का उत्साह यह दर्शाता है कि नई पीढ़ी अपनी सामाजिक जड़ों से कटने के बजाय, उसे आधुनिक रूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। युवाओं का यह प्रवेश आने वाले समय में संस्था के कामकाज में तकनीक और पारदर्शिता के नए युग की शुरुआत कर सकता है।
मतदान केंद्र पर नजर आया दृश्य समाज की निष्ठा को बयां करता था। भीषण ठंड और शारीरिक अशक्तता के बावजूद व्हीलचेयर पर पहुंचे बुजुर्गों ने यह संदेश दिया कि सामुदायिक लोकतंत्र में उम्र बाधा नहीं होती। बुजुर्गों का यह समर्पण युवाओं के लिए एक नैतिक दबाव और प्रेरणा, दोनों का कार्य करता है।
सेवानिवृत्त आरएएस अधिकारी दिनेश कोठारी के नेतृत्व में चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखने के लिए वोटर आईडी की अनिवार्य जांच और बैलेट पेपर का उपयोग किया गया। चुनावी रंगत ऐसी थी कि परिसर के बाहर समर्थकों का जमावड़ा किसी विधानसभा चुनाव की याद दिला रहा था, जो सामाजिक संस्थाओं में बढ़ती राजनीतिक चेतना का प्रमाण है।
ओसवाल सभा के ये चुनाव यह सिद्ध करते हैं कि स्थानीय सामाजिक इकाइयां आज भी जीवंत लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी हैं। परिणाम चाहे जो भी हो, 50 कार्य परिषद सदस्यों और एक सशक्त अध्यक्ष के चयन के बाद ओसवाल सभा के अगले तीन साल उदयपुर के सामाजिक और सेवाभावी परिदृश्य को नई गति प्रदान करेंगे।
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