नई दिल्ली: 19 जनवरी से माघ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा और दस महाविद्याओं को प्रसन्न करने के लिए विशेष सामग्री अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देवी को प्रिय ये चीजें—जैसे लौंग, ज्वार, पान और गुड़—केवल आध्यात्मिक महत्व ही नहीं रखतीं, बल्कि आयुर्वेद में इन्हें ‘औषधीय खजाना’ माना गया है। गुप्त नवरात्रि में इनका उपयोग न केवल मानसिक शांति देता है, बल्कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पाचन को भी अद्भुत मजबूती प्रदान करता है।
सेहत का खजाना हैं ये आयुर्वेदिक ‘प्रसाद’:
लौंग (प्राकृतिक पेनकिलर): यूजेनॉल से भरपूर लौंग दांत दर्द, माइग्रेन और सर्दी-जुकाम में रामबाण है। यह एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण मुंह की दुर्गंध और एसिडिटी को भी दूर करती है।
ज्वारे का रस (अमृत तुल्य): कलश स्थापना में प्रयुक्त होने वाले ज्वार का रस शरीर को डिटॉक्स करता है। यह विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट का भंडार है, जो ब्लड शुगर कंट्रोल करने और जोड़ों के दर्द में सहायक है।
पान का पत्ता (पाचन रक्षक): देवी कात्यायनी को प्रिय पान का पत्ता विटामिन सी और कैल्शियम का स्रोत है। यह कब्ज, खांसी और मुंह के बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है।
किशमिश और गुड़ (रक्त शोधक): किशमिश आयरन से भरपूर है जो एनीमिया दूर करती है। वहीं, मां काली को प्रिय गुड़ हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर को अंदर से साफ (डिटॉक्स) करता है।
तिल और इलायची (दोष नाशक): तिल हड्डियों और त्वचा के लिए सर्वोत्तम है, जबकि इलायची त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) को शांत कर पाचन और श्वसन तंत्र को दुरुस्त रखती है।
शहद (मधु): शहद अपने ‘योगवाही’ गुण के कारण अन्य औषधियों के प्रभाव को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है। यह कफ को संतुलित कर गले की खराश और घाव भरने में मदद करता है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान इन पवित्र वस्तुओं का भोग और औषधीय रूप में सही उपयोग आपको आध्यात्मिक और शारीरिक, दोनों प्रकार के लाभ प्रदान कर सकता है। हालांकि, किसी भी गंभीर बीमारी की स्थिति में विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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