
उदयपुर। दुनिया की अग्रणी एकीकृत जिंक उत्पादक और शीर्ष पांच चांदी उत्पादकों में शुमार हिंदुस्तान जिंक ने तकनीकी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अमेरिका के प्रतिष्ठित ‘R1’ रिसर्च संस्थान, वर्जीनिया टेक के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य लेड-जिंक कंसंट्रेटर प्लांट्स में सिल्वर (चांदी) रिकवरी को बेहतर बनाने के लिए उन्नत वैज्ञानिक शोध करना है।
वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता
इस सहयोग के तहत विशेष रूप से ‘फ्लोटेशन मेथड’ (Flotation Method) और ‘रिएजेंट्स’ के उपयोग को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे जमीन से निकाले गए अयस्क (Ore) से चांदी, लेड और जिंक जैसी कीमती धातुओं को अलग करने की प्रक्रिया और अधिक सटीक व कुशल हो जाएगी। वर्जीनिया टेक माइनिंग इंजीनियरिंग और मिनरल प्रोसेसिंग में अपनी वैश्विक विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है, जिसका लाभ अब हिंदुस्तान जिंक के ऑपरेशन्स को मिलेगा।
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने इस उपलब्धि पर कहा:
“हमारा मानना है कि माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ का अगला फेज साइंस और इनोवेशन से ही संभव है। वर्जीनिया टेक के साथ यह पार्टनरशिप हमारे नॉलेज इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और भविष्य की जरूरतों के लिए हमें तैयार रखेगी।”
वर्जीनिया टेक में माइनिंग विभाग के प्रमुख एरॉन नोबल ने भी इस सहयोग को ‘सार्थक प्रभाव’ डालने वाला कदम बताया है।
ज्ञान का आदान-प्रदान और ट्रेनिंग
यह प्रोजेक्ट न केवल उत्पादन बढ़ाएगा, बल्कि हिंदुस्तान जिंक की टीम की तकनीकी क्षमता को भी विकसित करेगा। इसके लिए विशेष कार्यशालाएं (Workshops) और ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे। हिंदुस्तान जिंक पहले भी IIT, CSIR लैबोरेटरीज और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च जैसे संस्थानों के साथ मिलकर तकनीक पर काम करता रहा है।
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