
उदयपुर/राजसमंद। वेदांता समूह की कंपनी और दुनिया की अग्रणी जिंक-सिल्वर उत्पादक, हिंदुस्तान जिंक ने सड़क सुरक्षा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने के उद्देश्य से अपनी सभी इकाइयों में ’37वां सड़क सुरक्षा माह’ और ‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह’ का भव्य आयोजन किया। 31 जनवरी 2026 तक चले इस महीने भर के अभियान के तहत हजारों कर्मचारियों, बिजनेस पार्टनर्स, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को सुरक्षित सड़क व्यवहार के प्रति जागरूक किया गया।
नेतृत्व और जन-भागीदारी का संगम
अभियान की शुरुआत कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व और जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा उद्घाटन समारोहों के साथ हुई। सुरक्षित ड्राइविंग के संदेश को फैलाने के लिए विभिन्न स्थानों पर ‘उत्साही बाइक रैलियों’ को हरी झंडी दिखाई गई। इन रैलियों में स्थानीय पुलिस और आरटीओ (RTO) अधिकारियों ने भी भाग लेकर साझा जिम्मेदारी का संदेश दिया।
जमीनी स्तर पर जागरूकता गतिविधियां
हिंदुस्तान जिंक की विभिन्न इकाइयों ने नवाचारी तरीकों से सुरक्षा का संदेश पहुँचाया:
आगुचा और जावर: यहाँ 500 से अधिक श्रमिकों को ब्लाइंड-स्पॉट ट्रेनिंग दी गई और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले ड्राइवरों को सम्मानित किया गया।
सिंदेसर खुर्द और दरीबा: कंपनी ने एक अनूठी पहल करते हुए आवारा मवेशियों के गले में रिफ्लेक्टिव नेक स्ट्रैप लगाए, ताकि रात के अंधेरे में सड़क हादसों को रोका जा सके। साथ ही ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य कैंप और हेलमेट वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए।
देबारी और चंदेरिया: यहाँ ‘रोको-टोको’ अभियान और ‘वीडीएसएस’ (VDSS) मॉडल वाहनों के प्रदर्शन के जरिए सड़क अनुशासन पर जोर दिया गया। स्कूली बच्चों के लिए इंटरैक्टिव क्विज़ और रक्षात्मक ड्राइविंग सत्र आयोजित किए गए।
तकनीकी जांच और सामुदायिक सुरक्षा
कायड़ माइन और पंतनगर यूनिट ने सार्वजनिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए सड़क सुरक्षा ऑडिट, नुक्कड़ नाटक और आंखों की जांच के कैंप लगाए। कम रोशनी वाली जगहों और ब्लाइंड स्पॉट्स पर रिफ्लेक्टर लगाकर सड़क के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित बनाने का प्रयास किया गया।
‘जीरो-हार्म कल्चर’ का संकल्प
हिंदुस्तान जिंक ने इस आयोजन के माध्यम से अपनी ‘जीरो-हार्म’ (शून्य क्षति) संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। कंपनी का मानना है कि सड़क सुरक्षा केवल नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यवहारिक बदलाव है जिसे हर नागरिक को अपनाना चाहिए। माइन, स्मेल्टर और गांवों में व्यापक स्तर पर चलाए गए इन कार्यक्रमों ने न केवल आंतरिक सुरक्षा मानकों को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी जागरूकता की नई मिसाल पेश की।
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