भगीरथ की तपस्या से सीखें धैर्य और लोकसेवा का संकल्प: प्रशांत अग्रवाल

नारायण सेवा संस्थान में आयोजित शिव भक्ति कथा; संस्थान अध्यक्ष ने की ‘अपनों से अपनी बात’, दिव्यांगजनों से जाना हाल

उदयपुर (8 अगस्त 2026): नारायण सेवा संस्थान में सावन मास के पावन अवसर पर आयोजित शिव भक्ति कथा में संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने श्रद्धालुओं को महाराज सगर के वंशजों के उद्धार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या और मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की पौराणिक कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगीरथ का जीवन धैर्य, दृढ़ संकल्प और लोककल्याण के लिए किए गए अथक प्रयासों की एक अनूठी मिसाल है।

भगीरथ तपस्या प्रसंग और शिव भक्ति का संदेश

प्रशांत अग्रवाल ने कथा के दौरान कहा कि राजा भगीरथ का संकल्प हमें यह सिखाता है कि जब व्यक्ति अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और मानवता के लिए काम करता है, तो ईश्वर भी उसका मार्ग प्रशस्त करते हैं:

  • धैर्य और मार्गदर्शन आवश्यक: मां गंगा के प्रचंड वेग को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया, जो यह दर्शाता है कि किसी भी महान लक्ष्य को पाने के लिए धैर्य, अनुशासन और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है।

  • संवेदना और समर्पण ही सच्ची सेवा: उन्होंने कहा कि आज के दौर में समाज को ऐसे विवेक की आवश्यकता है जो दूसरों के सुख-दुःख को समझे। सेवा वही सार्थक होती है जिसमें संवेदना, समर्पण और परोपकार की भावना समाहित हो।

‘अपनों से अपनी बात’: दिव्यांगजनों से लिया फीडबैक

कथा के उपरांत प्रशांत अग्रवाल ने संस्थान में उपचाररत दिव्यांगजनों और उनके परिजनों से ‘अपनों से अपनी बात’ कार्यक्रम के तहत सीधा संवाद किया:

  • उन्होंने दिव्यांगों से संस्थान द्वारा दी जा रही चिकित्सा व पुनर्वास सेवाओं के अनुभव पूछे और आगामी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव लिए।

  • लाभांवित दिव्यांगजनों व उनके परिजनों ने संस्थान की सेवाओं के प्रति कृतज्ञता और आभार जताया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने शिव भक्ति में लीन होकर मानव कल्याण और लोकसेवा का सामूहिक संकल्प लिया।

About Author

Leave a Reply