जिंदगी का मैच खत्म कर अंतिम सफर पर निकले अंपायर प्रो. रघुवीर सिंह : क्रिकेट और शिक्षा जगत का एक चमकता सितारा बुझा

प्रकृति शोध संस्थान में कल शाम 5. 00 बजे श्रद्धांजली दी जाएगी.

उदयपुर | जब मैदान पर अंपायर की उंगली उठती थी, तो फैसला अंतिम होता था। लेकिन आज नियति ने अपना वह ‘अंतिम फैसला’ सुना दिया जिसे कोई नहीं टाल सकता। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर और प्रख्यात भूगोलवेत्ता प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौड़ (88) शुक्रवार शाम क्रिकेट की पिच और जीवन के मंच को हमेशा के लिए छोड़कर चले गए।

शानदार करियर: जब उदयपुर की गूंज दुनिया ने सुनी

प्रो. राठौड़ उस दौर के नायक थे जब संसाधन कम और हौसले बुलंद थे। वे सेंट्रल जोन के पहले अंतरराष्ट्रीय टेस्ट अंपायर बने। 1992 में चंडीगढ़ के मैदान पर भारत-श्रीलंका टेस्ट हो या मद्रास में इंग्लैंड के खिलाफ कड़ी परीक्षा, उनकी पैनी नजरों ने कभी धोखा नहीं खाया। 7 वन-डे मैचों में उनकी निष्पक्षता का लोहा दिग्गज क्रिकेटरों ने भी माना।

गुरु ऐसे, जिनकी कक्षा से निकले देश के ‘सारथी’

मैदान के बाहर वे एक ऐसे शिक्षक थे जिन्होंने भूगोल के नक्शे पर केवल रेखाएं नहीं खींचीं, बल्कि अपने छात्रों का भविष्य उकेरा। आज पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया हों या बड़े प्रशासनिक अधिकारी, सब उसी गुरु की शिक्षा की छांव में पले-बढ़े हैं। सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के गलियारों में उनकी आवाज अब केवल यादों में गूंजेगी।

“वो भाई भी थे, गुरु भी और मार्गदर्शक भी”

उनके अभिन्न मित्र और पूर्व अंतरराष्ट्रीय अंपायर बलवंत शर्मा की आंखें नम हैं। वे कहते हैं, “45 साल का साथ एक पल में याद बन गया। उन्होंने मुझे छोटा भाई मानकर क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं।” 30 वर्षों तक उदयपुर जिला क्रिकेट संघ की सेवा करने वाले प्रो. राठौड़ ने राजस्थान के न जाने कितने युवाओं के हाथों में बल्ला और गेंद थमाई।

नम आंखों से विदाई

वंडर एकेडमी में जब शोक सभा हुई, तो वहां मौजूद हर खिलाड़ी और कोच की खामोशी उनकी महानता की गवाह थी। उदयपुर ने आज अपना एक ‘पितातुल्य’ मार्गदर्शक खो दिया है।

एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि

“मैदान की सफेद लकीरों से लेकर, भूगोल के नक्शों तक, आपने जो सिखाया, वो सदियों तक याद रहेगा। उंगली अब नहीं उठेगी किसी फैसले पर, आपका व्यक्तित्व ही अब हमारा हौसला बनेगा।”

प्रोफेसर रघुवीर सिंह राठौर प्रकृति शोध संस्थान के advisory बोर्ड से जुड़े हुये थे, उनका संस्थान की स्थापना मे एक परामर्श दाता के रूप मे मह्त्वपूर्ण योगदान रहा. भूगोल विभाग के HOD Prof P R Vyas थे तब फर्स्ट Prof A N भट्टाचार्य मेमोरियल लेक्चर दिया था, भूगोल विषय में एक आदर्श शिक्षक की छवि थी.

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