
उदयपुर। राजस्थान विधानसभा में पेश हुए पूर्ण बजट में लेक सिटी उदयपुर के लिए घोषणाओं का पिटारा तो खुला, लेकिन इन घोषणाओं के धरातल पर उतरने को लेकर शहरवासियों के मन में कई शंकाएं और तीखे सवाल भी तैर रहे हैं। एक ओर जहां शहर को सिग्नल फ्री करने और नए थानों का वादा किया गया है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट सिटी के दौर के पुराने जख्म अब भी हरे हैं।
आयड़ थाना : सुरक्षा या सौंदर्यीकरण की रखवाली?
बजट में आयड़ पुलिस चौकी को थाने में क्रमोन्नत करने का एलान हुआ है। सरकार का तर्क है कि इससे क्षेत्र में अपराध कम होंगे, लेकिन शहर के प्रबुद्ध वर्ग का कटाक्ष कुछ और ही है। चर्चा है कि क्या यह नया थाना इलाके के अपराधियों को पकड़ने के लिए है, या फिर आयड़ नदी के उस ‘सौंदर्यीकरण’ की निगरानी के लिए, जहां करोड़ों के पत्थर और घास पहली ही बारिश में बह गए? सवाल यह भी है कि सुखेर और प्रतापनगर जैसे उच्च अपराध दर वाले क्षेत्रों के बजाय आयड़ को प्राथमिकता क्यों दी गई? क्या पुलिस अब नदी में लगे पत्थरों की पहरेदारी करेगी?
अंडरग्राउंड बिजली के तार : 8 करोड़ में होगा वो चमत्कार, जो अरबों में न हो सका?
शहर में झूलते तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए 8.57 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सुनने में यह घोषणा राहतकारी है, लेकिन उदयपुर के पुराने शहर (वॉल सिटी) के लोग इसे संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं। ‘स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट’ के तहत अरबों रुपये फूँकने के बाद भी शहर की गलियां आज भी तारों के जाल से मुक्त नहीं हो पाई हैं। ऐसे में जनता पूछ रही है—जो काम बड़े प्रोजेक्ट्स नहीं कर पाए, क्या वो महज 8 करोड़ के बजट से पूरे हो जाएंगे? या फिर एक बार फिर सड़कें खोदकर शहर को धूल के हवाले कर दिया जाएगा?
सिग्नल फ्री का सपना और ब्रिज की चौड़ाई
प्रताप नगर-बलीचा मार्ग पर आयड़ नदी के ब्रिज को 2-लेन से 4-लेन करने और शहर को ‘सिग्नल फ्री’ बनाने का वादा किया गया है। हालांकि, तकनीकी जानकारों का मानना है कि बिना ठोस फ्लाइओवर और अंडरपास प्लानिंग के केवल बत्तियां बंद कर देने से ट्रैफिक जाम की समस्या और विकराल हो सकती है।
अन्य प्रमुख घोषणाएं : एक नज़र में
चिकित्सा : एमबी अस्पताल में मॉड्यूलर ओटी और कैंसर सेंटर के उपकरण।
शिक्षा व खेल : इलेक्ट्रिक वाहन ट्रेड की शुरुआत और आरएसएमएम के सहयोग से विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं।
जेल : सेंट्रल जेल के लिए नए भवन का निर्माण।
सामाजिक सुरक्षा : कथौड़ी जनजाति की महिला मुखिया को ₹1200 प्रति माह की आर्थिक मदद।
घोषणाओं का ‘धरातल’ कब दिखेगा?
बजट में सड़कों और पुलियाओं के लिए करोड़ों का प्रावधान तो है, लेकिन असली चुनौती ‘समयसीमा’ है। उदयपुर ने पिछले कई सालों में केवल बजट घोषणाएं और शिलान्यास देखे हैं, लेकिन आयड़ सौंदर्यीकरण और स्मार्ट ड्रेनेज जैसे प्रोजेक्ट्स आज भी अधूरे हैं।
जनता उम्मीद कर रही है कि यह बजट केवल कागजी आंकड़ों का मायाजाल न बनकर रहे, बल्कि झीलों की नगरी को सचमुच व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए।
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