
जयपुर/उदयपुर। कुछ उपलब्धियाँ केवल कागज के पन्नों पर दर्ज नहीं होतीं, वे इतिहास के सीने पर अपनी अमिट छाप छोड़ जाती हैं। उदयपुर के जिला कलेक्टर नमित मेहता को जब बुधवार को जयपुर में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने स्काउट-गाइड के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘सिल्वर एलिफेंट’ से अलंकृत किया, तो वह दृश्य केवल एक पुरस्कार वितरण मात्र नहीं था; वह एक अधिकारी की निष्ठा, रात-दिन की मेहनत और ‘अंत्योदय’ के संकल्प को मिला राष्ट्र का सबसे बड़ा नमन था।
वह यादें, वह जज्बा : रोहट की धरती पर रची गई इबारत
यह सम्मान नमित मेहता के उस ‘भगीरथ’ प्रयास का फल है, जिसे उन्होंने पाली कलेक्टर रहते हुए साकार किया था। 18वीं राष्ट्रीय जम्बूरी का वो आयोजन, जहाँ हज़ारों की संख्या में आए मासूम स्काउट्स और गाइड्स के चेहरों पर मुस्कान बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी।
एक अभिभावक सा संरक्षण: धूल भरे मैदानों को सुविधाओं के शहर में तब्दील करना और कड़ाके की ठंड में एक-एक बच्चे की सुविधा का ध्यान रखना, श्री मेहता ने एक ‘प्रशासक’ से अधिक एक ‘अभिभावक’ की भूमिका निभाई।
मिट्टी से जुड़ाव : यह अवार्ड उस पसीने की गवाही दे रहा है जो उन्होंने पाली के रोहट की तपती धरती पर उस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए बहाया था।
गरिमा का वो पल : जब राज्यपाल ने थापा कंधा
समारोह के उस भावुक क्षण में, जब राज्यपाल महोदय ने ‘सिल्वर एलिफेंट’ का पदक उनके सीने पर सजाया, तो समूचा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पंचायतीराज मंत्री ओटाराम देवासी और स्टेट चीफ कमिश्नर निरंजन आर्य की मौजूदगी ने इस पल की सार्थकता को और बढ़ा दिया। यह उस निस्वार्थ सेवा का प्रतिफल है जो एक अधिकारी अपने राजकीय दायित्वों से परे जाकर समाज के लिए करता है।
प्रेरणा का दीप : पूरे प्रदेश में हर्ष की लहर
उदयपुर की फिजाओं में आज एक अलग ही खुशी है। जिले के अधिकारी हों या आमजन, हर कोई अपने कलेक्टर की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित है।
“नमित मेहता जी का यह सम्मान हर उस युवा के लिए उम्मीद है जो मानता है कि प्रशासनिक शक्ति का सही उपयोग सेवा और अनुशासन के लिए किया जाना चाहिए।” — उदयपुर स्काउट-गाइड परिवार
जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. लोकेश भारती, सी.ओ. स्काउट सुरेन्द्र पाण्डे और सी.ओ. गाइड अभिलाषा मिश्रा सहित हज़ारों कार्यकर्ताओं ने नम आँखों और गर्व भरे दिल से अपने मार्गदर्शक को शुभकामनाएं दी हैं।
क्यों खास है यह उपलब्धि?
त्याग का प्रतीक: यह सम्मान उन विरले लोगों को मिलता है जिन्होंने स्काउट-गाइड के मूल्यों (अनुशासन, सेवा, देशप्रेम) को अपने जीवन में उतारा हो।
एक मील का पत्थर: सिल्वर एलिफेंट देश का वह सर्वोच्च शिखर है, जहाँ पहुँचने के लिए केवल पद नहीं, बल्कि ‘पात्रता’ और ‘तपस्या’ चाहिए।
कलेक्टर नमित मेहता ने सिद्ध कर दिया कि जब प्रशासनिक कलम में सेवा की स्याही और इरादों में राष्ट्रीय कल्याण का जज्बा हो, तो सम्मान खुद चलकर दहलीज तक आता है। यह ‘सिल्वर एलिफेंट’ केवल एक स्मृति चिन्ह नहीं, बल्कि उन हज़ारों स्काउट्स-गाइड्स का आशीर्वाद है, जिनके लिए उन्होंने एक बेहतर भविष्य की नींव रखी।
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