
उदयपुर। जब इरादों में मज़बूती और आँखों में बड़े सपने हों, तो कोई भी राह कठिन नहीं होती। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए, दुनिया की अग्रणी जिंक और सिल्वर उत्पादक कंपनी, हिंदुस्तान जिंक ने ‘विमन इन साइंस इंटरनेशनल डे’ के मौके पर एक ऐसी पहल की है, जो रूढ़ियों को तोड़कर नई इबारत लिख रही है। अभियान का नाम है— ‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’।
यह महज़ एक अभियान नहीं, बल्कि उन युवा बेटियों के लिए एक खुला आसमान है जो अब तक माइनिंग और इंजीनियरिंग की दुनिया को सिर्फ अपनी किताबों के पन्नों में ही देखती आई थीं।
जब किताबों के शब्द हकीकत बनकर सामने आए
उदयपुर की धरती पर जब IIT (ISM) धनबाद, MNIT जयपुर और बनस्थली विद्यापीठ जैसी संस्थाओं की छात्राएं हिंदुस्तान जिंक के ऑपरेशन्स देखने पहुँचीं, तो उनकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। जिन बड़ी मशीनों, जटिल स्मेल्टर्स और गहरी खदानों के बारे में उन्होंने क्लासरूम में सुना था, उन्हें अपने सामने संचालित होते देख इन युवा ‘विमन इन साइंस’ का आत्मविश्वास देखते ही बनता था।
MBM यूनिवर्सिटी की छात्रा अंकिता गौड़ की बातों में वह उत्साह साफ झलकता है, वे कहती हैं, “मैकेनिकल इंजीनियरिंग की जिन थ्योरीज को मैंने किताबों में पढ़ा, उन्हें यहाँ अपनी आँखों के सामने हकीकत में बदलते देखना किसी जादू से कम नहीं है।” यह अहसास ही इस मुहिम की असली सफलता है।
आत्मनिर्भरता और विविधता का नया अध्याय
हिंदुस्तान जिंक ने केवल बातें नहीं कीं, बल्कि आंकड़ों के साथ बदलाव की मिसाल पेश की है। आज कंपनी के साथ 700 से अधिक महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं, जिनमें से 200 से अधिक विमन इंजीनियर्स खदानों और प्लांट के सबसे चुनौतीपूर्ण ‘कोर ऑपरेशनल रोल’ में तैनात हैं।
कंपनी का संकल्प स्पष्ट है— वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत डायवर्सिटी हासिल करना। यह लक्ष्य केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि आने वाले समय में देश की माइनिंग इंडस्ट्री का नेतृत्व महिलाएं करेंगी।
एक ऐसा वातावरण, जहाँ पंखों को मिलती है उड़ान
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने बड़े ही भावुक और दूरदर्शी अंदाज़ में कहा:
“हम समावेशिता को केवल एक नीति नहीं, बल्कि अपनी सामरिक ताकत मानते हैं। हमारा उद्देश्य है कि इन युवा प्रतिभाओं के लिए अपने दरवाज़े खोलकर उनके भीतर वो भरोसा पैदा करें कि वे भी इस सेक्टर की लीडर बन सकती हैं। जब एक महिला खदान की गहराई में या लैब की मेज पर खड़ी होती है, तो वह पूरे समाज की सोच को बदल रही होती है।”
तकनीक और संवेदनशीलता का मेल
आज डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन ने इस कठिन क्षेत्र को महिलाओं के लिए सुलभ बना दिया है। हिंदुस्तान जिंक की नीतियां जैसे— फ्लेक्सिबल वर्किंग, नाइट शिफ्ट में भागीदारी और मेंटल वेलनेस लीव— यह सुनिश्चित करती हैं कि एक महिला प्रोफेशनल को करियर और परिवार के बीच चुनाव न करना पड़े, बल्कि वह दोनों में उत्कृष्टता हासिल करे।
‘शी नोज द ग्राउंड शी स्टैंड्स ऑन’ अभियान यह साबित करता है कि अब बेटियाँ केवल ज़मीन पर खड़ी नहीं हैं, बल्कि वे उस ज़मीन की ताक़त और उसके भीतर छिपे संसाधनों को भी बखूबी समझती हैं। यह सफर है बंदिशों से गौरव तक का, और किताबों से असल कामयाबी तक का।
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