यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि भरोसे की हत्या है…

बांसवाड़ा। सोशल मीडिया पर वर्दी का झूठ पहनकर एक शातिर ठग ने न केवल एक युवती का दिल जीता, बल्कि उसकी ज़िंदगी की जमा-पूंजी भी लूट ली। खुद को IPS बताने वाला अक्षत राज कोठारी दरअसल कोई अफसर नहीं, बल्कि एक पेशेवर धोखेबाज़ निकला।

फेसबुक पर शुरू हुई दोस्ती ने जब शादी का रूप लिया, तब पीड़िता ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस व्यक्ति के साथ वह भविष्य के सपने देख रही है, वही उसे कर्ज़ और अकेलेपन के अंधेरे में छोड़कर भाग जाएगा। शादी के बाद दस्तावेजों का दुरुपयोग कर 19 लाख का लोन लेना और फिर फरार हो जाना, यह सिर्फ कानूनन अपराध नहीं, बल्कि नैतिक पतन की पराकाष्ठा है।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि आरोपी पर पहले से 19 धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। सवाल यह उठता है कि इतना लंबा आपराधिक इतिहास होने के बावजूद वह बार-बार लोगों को कैसे ठगता रहा? क्या सोशल मीडिया पर पहचान की कोई जिम्मेदारी नहीं? क्या भरोसे की इतनी सस्ती कीमत हो गई है?

हालांकि, बांसवाड़ा साइबर थाना पुलिस ने डिजिटल फुटप्रिंट के सहारे आरोपी को इंदौर से पकड़कर यह साबित किया कि तकनीक अगर अपराधी के हाथ में हथियार है, तो पुलिस के हाथ में ढाल भी। यह गिरफ्तारी सिर्फ एक ठग की नहीं, बल्कि उन तमाम लोगों के लिए चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर दिखने वाले चेहरों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं।

यह मामला समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि
वर्दी का सम्मान जरूरी है, लेकिन वर्दी का दिखावा करने वालों से सतर्क रहना उससे भी ज्यादा जरूरी है।

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