
फोटो एंड रिपोर्ट : लतीफ
उदयपुर। शहर के मल्लातलाई क्षेत्र की मुख्य सड़क एक बार फिर खून से लाल हो गई। तेज़ रफ्तार और बेकाबू वरना कार ने सुबह-सुबह चाय की थड़ी को इस कदर रौंद दिया कि दो ज़िंदगियां मौके पर ही खत्म हो गईं और दो लोग ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है। यही सड़क… यही रफ्तार… और हर बार वही नतीजा—मौत।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार इतनी तेज़ थी कि चाय का ठेला उड़ाते हुए पास लगे गार्डन की रेलिंग से जा टकराई। ठेले पर चाय पी रहे बुजुर्ग अब्दुल मजीद (76) और इमरान (35) की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं ठेला संचालक जीवन चारण और अर्जुन चारण गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है।
हादसे के बाद का मंजर और भी ज्यादा झकझोर देने वाला था। करीब आधे घंटे तक क्षत-विक्षत शव सड़क पर पड़े रहे। सूचना देने के बावजूद पुलिस एक घंटे बाद मौके पर पहुंची। बिलखते परिजन, खून से सनी सड़क और सवालों के घेरे में खड़ा सिस्टम—सब कुछ मौके पर मौजूद था, बस प्रशासन नहीं।
आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर मृतकों के परिजनों को मुआवजा और हादसे के जिम्मेदार कार चालक की गिरफ्तारी की मांग की। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार में सवार दो लोग एयरबैग खुलने से बच गए और हादसे के बाद मौके से फरार हो गए।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद जिले के आला अफसर नहीं आए। पूरी कमान सिर्फ एक थानाधिकारी के भरोसे छोड़ दी गई। लोग सवाल पूछते रहे—क्या दो मौतें भी प्रशासन को झकझोरने के लिए काफी नहीं हैं?
समझाइश के नाम पर सड़क तो खुलवा दी गई, लेकिन परिजन और समाजजन सड़क के दोनों ओर जमा रहे। सुबह 11:30 बजे तक भी प्रशासन की ओर से कोई आश्वासन, कोई मौजूदगी नजर नहीं आई। मुआवजा मिले या न मिले, लेकिन हादसा छोटा नहीं था—और लापरवाही उससे भी बड़ी।
बाद में भीड़ घटनास्थल से हटकर एमबी चिकित्सालय की मोर्चरी पहुंची, जहां पोस्टमार्टम होना है। मोर्चरी के बाहर भी शोक, आक्रोश और सवालों का सैलाब था।
मल्लातलाई की यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं रही, यह अब सिस्टम की लापरवाही की पहचान बन चुकी है। सवाल यह है—अगली मौत से पहले क्या प्रशासन जागेगा, या फिर यह सड़क यूं ही हर बार किसी घर का चिराग बुझाती रहेगी?
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