नारायण सेवा संस्थान का 45वां सामूहिक विवाह : 14-15 मार्च को 51 दिव्यांग जोड़े थामेंगे एक-दूसरे का हाथ

उदयपुर। विश्व स्तर पर दिव्यांगता और गरीबी की चुनौती से जूझ रहे परिवारों के लिए नारायण सेवा संस्थान एक नई किरण लेकर आया है। आगामी 14 और 15 मार्च 2026 को संस्थान के ‘सेवा महातीर्थ, बड़ी’ परिसर में 45वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए 51 जोड़े (102 वर-वधू) पवित्र अग्नि के फेरे लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगे।

उपचार से लेकर गृहस्थी तक का सफर

इस विवाह की सबसे खास बात यह है कि इनमें से कई वर-वधू वे हैं, जिनका इसी संस्थान में:

निःशुल्क ऑपरेशन हुआ और उन्हें नया जीवन मिला।

कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण प्रदान किए गए।

कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया।

संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने बताया कि पिछले 21 वर्षों में संस्थान अब तक 2510 दिव्यांगों का घर बसा चुका है। यह मॉडल दुनिया के लिए एक उदाहरण है कि कैसे दिव्यांगजन को दया की जगह सम्मान और अवसर देकर मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

चुनौतियां और संस्थान का ‘समग्र सहयोग’

दिव्यांग विवाह में आने वाली सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए संस्थान यह सुविधाएं सुनिश्चित करता है:

पारदर्शी चयन: उपयुक्त जीवनसाथी के चुनाव में पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता।

निःशुल्क व्यवस्था: विवाह समारोह का सारा खर्च संस्थान और दानदाताओं द्वारा वहन किया जाता है।

आत्मनिर्भरता: सिलाई मशीन और कौशल विकास के जरिए आजीविका का मार्ग प्रशस्त करना।

नया घर बसाने के लिए ‘गृहस्थी उपहार’
नवदंपतियों को अपनी नई गृहस्थी शुरू करने में कोई परेशानी न हो, इसके लिए संस्थान द्वारा घरेलू उपयोग की संपूर्ण सामग्री भेंट की जाएगी:

फर्नीचर व आराम: पलंग, गद्दा, तकिए, कंबल, चादर और अलमारी।

रसोई का सामान: गैस चूल्हा, सिलेंडर, प्रेशर कुकर, कढ़ाई और स्टील के बर्तनों का पूरा सेट।

दैनिक उपयोग की वस्तुएं: पंखा, पानी की टंकी, बाल्टी, ड्रम और ट्रॉली बैग।

सहायक उपकरण: आवश्यकतानुसार व्हीलचेयर या अन्य सहायक उपकरण।

सामाजिक संदेश और अतिथि

यह दो दिवसीय उत्सव वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देश-विदेश के दानदाता, संत-महात्मा और जनप्रतिनिधि साक्षी बनेंगे। कई गणमान्य नागरिक स्वयं ‘कन्यादान’ की रस्म निभाकर इन जोड़ों को आशीर्वाद देंगे।

उद्देश्य : दिव्यांगों को गरिमापूर्ण पारिवारिक जीवन प्रदान करना।

 

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