
उदयपुर। गुजराती समाज भवन में रविवार को आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय समन्वय समिति की बैठक शुरू हुई। त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देश के 13 राज्यों के आदिवासी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकारें कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुँचाने के लिए आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का दमन कर रही हैं।
बजट और जनगणना पर उठाए सवाल : जितेंद्र चौधरी
त्रिपुरा के नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी ने केंद्र सरकार के आंकड़ों पर प्रहार करते हुए कहा:
बजट में कटौती: देश में आदिवासियों की आबादी 8.6% है, लेकिन बजट आवंटन मात्र 2.58% ही किया गया है। पिछला आवंटित बजट भी पूरी तरह खर्च नहीं हो पाया।
पहचान का संकट: उन्होंने मांग की कि आगामी जनगणना में आदिवासियों की विशिष्ट पहचान और उनकी आस्था के कॉलम को शामिल किया जाए।
रोजगार: मनरेगा को खत्म कर नई योजना (वी.बी. राम जी अधिनियम) लाई गई, लेकिन बजट के अभाव में यह 125 दिन का रोजगार देने में विफल साबित होगी।
राजस्थान में आरक्षण और विस्थापन पर घेरा : वृंदा करात
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वृंदा करात ने राजस्थान की ‘डबल इंजन’ सरकार पर आदिवासियों के खिलाफ ‘अघोषित युद्ध’ छेड़ने का आरोप लगाया:
नौकरियों में धांधली : उन्होंने कहा कि प्रथम, द्वितीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्तियों में आरक्षण नीति का पालन नहीं हो रहा है। संविदा और आउटसोर्सिंग के जरिए आदिवासियों को हक से वंचित किया जा रहा है।
जबरन विस्थापन : उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में परमाणु बिजली घर, बांध और सड़कों के नाम पर बिना उचित मुआवजे और बिना ग्राम सभा की अनुमति के आदिवासियों को पुलिस बल के दम पर उजाड़ा जा रहा है।
अमानवीयता : झाड़ोल के अम्बासा गाँव में वन विभाग द्वारा महिलाओं पर की गई क्रूरता को उन्होंने अमानवीयता की पराकाष्ठा बताया।
अरावली और पहचान का मुद्दा : बास्के और दुलीचंद
पुलिन बास्की (राष्ट्रीय संयोजक) : उन्होंने कहा कि सरकार आदिवासियों की पहचान मिटाने के लिए ‘बुलडोजर नीति’ अपना रही है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से आदिवासी किसानों को भारी नुकसान होगा।
दुलीचंद (अध्यक्ष, आदिवासी जनाधिकार एका मंच): अरावली पर्वतमाला को खनन माफियाओं के हवाले करने की साजिश के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्होंने कहा कि अरावली केवल पहाड़ नहीं, आदिवासियों के आत्मसम्मान और जीवन का आधार है।
आगामी कार्यक्रम
राज्य सचिव विमल भगोरा ने बताया कि बैठक के दूसरे दिन (सोमवार) दोपहर 1 बजे “डबल इंजन सरकार और आदिवासियों की स्थिति” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। इसमें आगामी आंदोलनों और देशव्यापी कार्यवाहियों का ऐलान किया जाएगा।
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