ईरान-इजरायल युद्ध का 16वां दिन – क्षेत्रीय महाविनाश की ओर बढ़ते कदम

 

तेलअवीव/तेहरान/वाशिंगटन।

 

मध्य पूर्व में युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। 28 फरवरी को शुरू हुई यह सैन्य कार्रवाई आज अपने सबसे घातक चरण में पहुंच गई है। आज की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह अब केवल एक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ या सीमित संघर्ष नहीं, बल्कि एक “पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध” (Full-Scale Regional War) है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों के बीच तेहरान ने संकेत दिया है कि वह लंबे युद्ध के लिए तैयार है। इज़राइल के मिसाइल हमलों ने ईरान के मध्य स्थित इस्फहान प्रांत के कई ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें दर्जनों लोगों के मारे जाने की खबर है। इस बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर गंभीर प्रभाव डालना शुरू कर दिया है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि तेहरान ने कभी भी अमेरिका से युद्धविराम की मांग नहीं की। उनका कहना है कि ईरान इस संघर्ष का सामना करने के लिए तैयार है और देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

खाड़ी देशों के साथ संबंधों पर पुनर्विचार

ईरान के सऊदी अरब में राजदूत अलीरेज़ा एनायती ने कहा कि अमेरिका-इज़राइल संघर्ष के कारण खाड़ी देशों के साथ ईरान के संबंधों की “गंभीर समीक्षा” आवश्यक हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि ईरान और सऊदी अरब पड़ोसी होने के कारण एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते।

एनायती ने सऊदी अरब के तेल ढांचे पर हाल में हुए ड्रोन हमलों में ईरान की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि यदि ईरान ऐसा करता तो वह इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करता। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है कि बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप कम हो और क्षेत्रीय देश मिलकर समाधान तलाशें।

लेबनान में भी बढ़ा तनाव

इस संघर्ष का असर लेबनान में भी दिखाई दे रहा है। लेबनानी संगठन हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के तैयबह इलाके के पास इज़राइली सैनिकों पर हमला किया। साथ ही इज़राइल-लेबनान सीमा के पास स्थित किरीयात शमोना और अवीविम जैसे कस्बों को भी निशाना बनाने की बात कही गई है।

दूसरी ओर इज़राइली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान के कई शहरों में हवाई हमले किए। इन हमलों के कारण बड़ी संख्या में लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। लेबनान सरकार के अनुसार अब तक 8.31 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और देशभर में सैकड़ों राहत शिविर खोले गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र बल पर भी गोलीबारी

दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना यूएनआईफिल की गश्त पर भी तीन अलग-अलग घटनाओं में गोलीबारी हुई। हालांकि किसी शांति सैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। संयुक्त राष्ट्र ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र

युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर देखा जा रहा है, जो दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल परिवहन का मार्ग है। ईरान द्वारा इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को प्रभावी रूप से बंद किए जाने के कारण वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मार्ग को सुरक्षित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन बनाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकती है और इससे तनाव और बढ़ सकता है।

क्षेत्रीय शक्ति संतुलन की परीक्षा

विश्लेषकों के अनुसार यह संघर्ष केवल सैन्य शक्ति का नहीं बल्कि सहनशक्ति और रणनीतिक दबाव का भी युद्ध बनता जा रहा है। यदि ईरान लंबे समय तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित रखता है, तो उसके पास अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की क्षमता बनी रहेगी।

इस बीच, पूरे क्षेत्र में युद्ध का विस्तार होने का खतरा बना हुआ है। लेबनान, यमन और खाड़ी देशों की स्थिति बताती है कि यह संघर्ष केवल ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है।

 

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