
लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में सजी 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स की शाम उम्मीदों, जज्बात और सिनेमाई जादू के नाम रही। इस साल ऑस्कर के मंच पर एक लंबा इंतजार खत्म हुआ और नए दौर के सिनेमा ने अपनी धमक सुनाई।
पॉल थॉमस एंडरसन: 14 नामांकन के बाद आखिरकार ‘गोल्डन स्टैच्यू’
हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक पॉल थॉमस एंडरसन के लिए यह रात किसी सपने के सच होने जैसी थी। उनकी फिल्म ‘वन बैटल ऑफ़्टर एनदर’ (One Battle After Another) ने ‘बेस्ट पिक्चर’ समेत छह श्रेणियों में जीत दर्ज कर धमाका कर दिया।
इंतज़ार का अंत : एंडरसन को इससे पहले 14 बार नामांकित किया गया था, लेकिन जीत का स्वाद उन्होंने इसी साल चखा। उन्होंने मंच से 1975 के सिनेमाई स्वर्ण युग को याद करते हुए इस जीत को अपनी टीम और दर्शकों के नाम किया।
एक्टिंग का लोहा : दिग्गज अभिनेता सीन पेन ने इसी फिल्म के लिए ‘बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर’ का खिताब जीतकर साबित कर दिया कि अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता।
‘सिनर्स’ : सुपरनैचुरल थ्रिलर का नया कीर्तिमान
रेयान कूगलर की फिल्म ‘सिनर्स’ (Sinners) ने इस साल रिकॉर्ड 16 नामांकन हासिल किए थे। हालांकि यह ‘बेस्ट पिक्चर’ की रेस में पिछड़ गई, लेकिन ‘बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले’ जीतकर इसने कहानी के नए आयाम स्थापित किए। वैम्पायर शैली पर आधारित इस फिल्म ने मुख्यधारा के सिनेमा में डरावनी कहानियों को सम्मानजनक स्थान दिलाया है।
‘फ्रैंकस्टीन’ और गिलेरमो डेल टोरो की जादुई दुनिया
गिलेरमो डेल टोरो की सिनेमाई शैली हमेशा से अपनी बारीकियों के लिए जानी जाती है। उनकी फिल्म ‘फ्रैंकस्टीन’ ने तकनीकी क्षेत्रों में बाजी मारी:
बेस्ट मेकअप और हेयरस्टाइलिंग और बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइन के जरिए इस फिल्म ने दर्शकों को एक अलग ही कालखंड में पहुँचा दिया। केट हॉली ने अपनी जीत का श्रेय डेल टोरो के विजन को दिया।
वैश्विक मंच पर गूंजी आवाज़ें : ईरान से ब्राज़ील तक
इस साल के ऑस्कर में केवल हॉलीवुड का बोलबाला नहीं रहा, बल्कि वैश्विक मुद्दों ने भी अपनी जगह बनाई:
ईरानी जज्बा : ईरानी डॉक्यूमेंट्री ‘क्रैकिंग द रॉक्स’ के निर्देशकों, सारा खाकी और मोहम्मद रज़ा ऐनी ने अपना नामांकन उन ईरानी लोगों को समर्पित किया जो कठिन परिस्थितियों में जी रहे हैं।
लैटिन अमेरिका और स्पेन: ब्राज़ीलियाई फिल्म ‘द सीक्रेट एजेंट’ और स्पेन की ‘सिराट’ ने इंटरनेशनल फिल्म की कैटेगरी में कड़ी टक्कर देकर विश्व सिनेमा की विविधता को दर्शाया।
ग्लैमर, रेड कार्पेट और प्रियंका चोपड़ा
समारोह की चमक-धमक हमेशा की तरह बरकरार रही। प्रियंका चोपड़ा जोनस ने बतौर प्रेजेंटर मंच साझा कर वैश्विक मंच पर भारत की उपस्थिति दर्ज कराई। एम्मा स्टोन, टिमोथी शैलामे, और लियोनार्डो डिकैप्रियो जैसे सितारों ने अपने लुक्स से फैशन पंडितों को प्रभावित किया। वहीं, मेजबान कॉनन ओ’ब्रायन ने अपनी हाज़िरजवाबी से पूरे हॉल को ठहाकों से सराबोर रखा।
सिनेमा का भविष्य सुरक्षित है
98वां एकेडमी अवॉर्ड्स इस बात का सबूत है कि ऑस्कर अब पारंपरिक कहानियों से आगे बढ़कर ‘फंतासी’, ‘हॉरर’ और ‘इंटरनेशनल’ सिनेमा को गले लगा रहा है। जहाँ पुराने दिग्गजों को उनका हक मिला, वहीं चेस इनफ़िनिटी और टेयाना टेलर जैसे नए कलाकारों ने फिल्म उद्योग के उज्ज्वल भविष्य की झलक दिखाई।
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