विश्व गौरैया दिवस पर विशेष : नन्ही चिड़िया की घटती संख्या चिंता का विषय

उदयपुर। आज विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर पर्यावरण प्रेमियों और विशेषज्ञों ने गौरैया की तेजी से घटती संख्या पर चिंता जताई है। कभी हर घर-आंगन में चहचहाने वाली यह छोटी चिड़िया अब शहरों और गांवों दोनों जगहों से लगभग गायब होती जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पहले कच्चे मकानों की दीवारों और छतों में बने छोटे-छोटे खांचे गौरैया के घोंसलों के लिए उपयुक्त होते थे। लेकिन आधुनिक पक्के मकानों में ऐसी जगहों की कमी के कारण इन्हें आश्रय नहीं मिल पा रहा है। कई बार ये घरों के अंदर भटक जाती हैं और पंखों या अन्य उपकरणों से टकराकर मर जाती हैं।

गौरैया केवल दाना खाने वाली चिड़िया नहीं, बल्कि किसानों की मित्र भी मानी जाती है। यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। साथ ही, घरों में बिखरे छोटे खाद्य कणों को साफ करने में भी मददगार होती है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि केवल मोबाइल टावर ही नहीं, बल्कि इंसानों द्वारा बदलती जीवनशैली और घरों की संरचना ने भी गौरैया के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है।

इस अवसर पर लोगों से अपील की गई है कि वे अपने घरों में गौरैया के लिए छोटे घोंसले, पानी के बर्तन और दाने की व्यवस्था करें, ताकि इस नन्ही चिड़िया को फिर से सुरक्षित आश्रय मिल सके।

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