
उदयपुर। ममता, त्याग और निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति ‘मां’ को समर्पित मदर्स डे रविवार को लेकसिटी के नारायण सेवा संस्थान में बेहद भावुक और संवेदनापूर्ण अंदाज में मनाया गया। संस्थान के बड़ी स्थित सेवा परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में देश के कोने-कोने से दिव्यांग बच्चों के साथ उनके इलाज और पुनर्वास के लिए आईं माताओं का सम्मान किया गया। इस दौरान पूरा परिसर मातृत्व, अपनत्व और सेवा के अनूठे संगम का गवाह बना।
समारोह में जब दिव्यांग बच्चों ने अपनी माताओं के चेहरों पर संतोष और गर्व के भाव देखे, तो उनके चेहरों पर भी मासूम मुस्कान बिखर गई।
माताओं को भेंट किए उपहार और स्मृति चिह्न
इस बेहद खास मौके पर संस्थान की ओर से उपस्थित सभी माताओं और दिव्यांग बच्चों के साथ गहरा आत्मीय संवाद स्थापित किया गया। उनके संघर्षों और समर्पण को नमन करते हुए माताओं को विशेष उपहार तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कई माताओं की आंखें इस सम्मान और अपने बच्चों की खुशी को देखकर सजल (नम) हो गईं।
“दिव्यांग बच्चों की माताओं का त्याग और धैर्य है मिसाल”
इस भावुक क्षण पर अपनी बात रखते हुए नारायण सेवा संस्थान की निदेशक वंदना अग्रवाल ने कहा, “मां वास्तव में ईश्वर का वह जीवित रूप है, जो हर विषम परिस्थिति में अपने बच्चों का सबसे बड़ा संबल बनकर उनके जीवन की राह को आसान बनाती है। विशेषकर दिव्यांग बच्चों की माताओं का जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण होता है और वे त्याग, असीम धैर्य तथा अटूट समर्पण की जीवंत मिसाल हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि नारायण सेवा संस्थान का उद्देश्य केवल दिव्यांग बच्चों का शारीरिक उपचार करना ही नहीं है, बल्कि उनके परिवारों को मानसिक और भावनात्मक रूप से भी सशक्त बनाना है। मदर्स डे जैसे संवेदनशील आयोजन इन परिवारों के भीतर जीवन को नए नजरिए से जीने की सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। इस गरिमामयी कार्यक्रम में संस्थान के कई वरिष्ठ साधक, स्वयंसेवक और दिव्यांग परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।
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