मुहर्रम जुलूस में ज़हर बांटने की खौफनाक साज़िश : दो सहेलियों की जांबाजी से टला 30 हजार लोगों पर मँडराता मौत का साया

मुंबई। मुंबई का भायखला इलाका बीते 26 जून की शाम को मातम के जुलूस में डूबा हुआ था. अंजीरवाड़ी से रहमत बाग कब्रिस्तान की ओर बढ़ रहे मुहर्रम के इस ऐतिहासिक जुलूस में करीब 30 हजार अकीदतमंदों का हुजूम शामिल था. चारों तरफ मजहबी सरगर्मियां थीं, कोई थका हारा था तो कोई इबादत में लीन था. लेकिन इस पवित्र और गमगीन माहौल के बीच भीड़ में एक ऐसा दरिंदा भी घूम रहा था, जो अपने हाथों में ‘तबर्रुक’ (प्रसाद) के नाम पर मौत का सामान बांट रहा था.

हजारों मासूमों की जिंदगी को लील जाने की इस खौफनाक साजिश के आगे ढाल बनकर खड़ी हो गईं दो जांबाज महिलाएं— इहलाम हमीदी और रुखसार सैयद. अगर इन दोनों सहेलियों ने उस काली रात अपनी जान की परवाह न करते हुए सूझबूझ और बेखौफ हिम्मत न दिखाई होती, तो आज मातम का यह जुलूस देश के सबसे बड़े नरसंहार में तब्दील हो चुका होता.

‘तबर्रुक’ फेंकने के उस अजीब तरीके ने जगाया शक

इहलाम हमीदी (कॉफी व्यवसायी) और रुखसार सैयद (कॉस्मेटिक व्यवसायी) दोनों गहरी सहेलियां हैं और बरसों से समाजसेवा में सक्रिय हैं. 26 जून को दोनों माझगांव मस्जिद के बाहर वॉलंटियर के तौर पर तैनात थीं. तभी उनकी नजर एक शख्स पर पड़ी जो अजीब तरीके से भीड़ में कैप्सूल फेंक-फेंक कर बांट रहा था. वह चिल्ला रहा था कि यह हर मर्ज की दवा है, विटामिन-सी की गोली है, इसे खाने से सारी थकान दूर हो जाएगी.

थके-हारे लोग उसे ‘नियाज-ए-हुसैन’ (मजहबी प्रसाद) समझकर निगलते जा रहे थे. इहलाम हमीदी बताती हैं, “वह शख्स जिस तरह कैप्सूल फेंक रहा था, मुझे खटक गया, क्योंकि तबर्रुक इस तरह बेहूदगी से नहीं बांटा जाता. एक पैकेट मेरे पैर के पास गिरा. अंधेरा होने के कारण पैकेट पर कुछ साफ नहीं दिख रहा था, लेकिन जब मैंने उसे खोलकर सूंघा, तो उसमें से एक बेहद अजीब और तीखी गंध आ रही थी.”

दोनों सहेलियों ने फौरन कैप्सूल खोलकर देखा तो उसके अंदर काला पाउडर था. उन्होंने गूगल पर भी खंगाला लेकिन कुछ पता नहीं चला. उनका दिल गवाही दे चुका था कि यह कोई दवा नहीं, बल्कि कुछ बेहद खौफनाक है.

जब रुखसार ने पकड़ ली मौत के सौदागर की कॉलर!

वह संदिग्ध शख्स वहां से चुपचाप निकलने की फिराक में था. बिना एक पल गंवाए रुखसार और इहलाम ने दौड़कर उसे बीच रास्ते में रोक लिया. उसके हाथ में एक बड़ा नीला बैग था जो मौत के उन घातक कैप्सूलों से ठसाठस भरा हुआ था. जब दोनों ने उससे सवाल किए तो वह घबराने लगा और भागने की कोशिश करने लगा.

उस नाजुक मोड़ पर रुखसार ने शेरनी सी बहादुरी दिखाई और भीड़ के बीच ही उस आरोपी की कॉलर पकड़कर उसे दबोच लिया. इहलाम ने झपट्टा मारकर उसके हाथ से नीले रंग का बैग छीन लिया. आरोपी के साथ मौजूद दो और मददगार अपने थैले छोड़कर भीड़ का फायदा उठाकर भाग निकले.

दोनों महिलाओं ने तुरंत पुलिस को इत्तिला दी और सूझबूझ दिखाते हुए जुलूस के लाउडस्पीकर से मुनादी करवा दी कि कोई भी इस कैप्सूल को न खाए. देखते ही देखते स्वयंसेवकों की मदद से बांटे जा चुके कैप्सूल वापस इकट्ठे किए गए और पुलिस को सौंप दिए गए. करीब 20 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने हजारों जिंदगियों को बचा लिया.

50 किलो चूहे मारने का ज़हर और 15,900 मौत के कैप्सूल बरामद

पुलिस ने जब मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लिया, तो उसके पास से 14,900 तैयार कैप्सूल बरामद हुए. जांच में सामने आया कि यह आरोपी पुणे के विमाननगर का रहने वाला 39 वर्षीय फैयाज निसार प्रेमजी है.

पुलिस की पूछताछ में जो सच बाहर आया उसने सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए. आरोपी फैयाज ने कबूल किया कि वह पूरे जुलूस को निशाना बनाकर बड़े पैमाने पर तबाही मचाना चाहता था. उसने बाजार से 50 किलो जिंक फॉस्फाइड (चूहे मारने का अत्यंत घातक जहर) और 30 हजार खाली कैप्सूल खरीदे थे. वह पिछले 15 दिनों से मुंबई के एक होटल में रहकर इन कैप्सूलों में जहर भरने का काम कर रहा था.

चार लोग हुए शिकार, अस्पताल में जिंदगी की जंग

भले ही इहलाम और रुखसार ने इस बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया, लेकिन उनके पकड़ने से पहले ही चार बदनसीब लोग इस जहर का शिकार हो चुके थे. शिवाजीनगर के रहने वाले सलमान सैयद और सैयद अब्बास सहित चार लोगों को यह कैप्सूल खाते ही भीषण उल्टियां और बेचैनी होने लगी, जिसके बाद उन्हें फौरन हबीब अस्पताल में भर्ती कराया गया. गनीमत रही कि समय पर इलाज मिलने से चारों की हालत अब स्थिर और खतरे से बाहर है.

देश सलाम कर रहा है इन बेटियों को

मुंबई ज़ोन-1 के डीसीपी जयंत मीणा और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने दोनों वीर महिलाओं की मुरीद होते हुए कहा कि अगर ये दोनों नागरिक सतर्कता न दिखातीं, तो आज भायखला की धरती लाशों से पट जाती.

अदालत ने आरोपी फैयाज प्रेमजी को दो दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. पुलिस अब उसके डिजिटल सबूत खंगाल रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस खौफनाक साजिश के पीछे और कौन से राष्ट्रविरोधी चेहरे शामिल हैं. लेकिन आज पूरा देश इहलाम हमीदी और रुखसार सैयद की इस जांबाजी को सलाम कर रहा है, जिन्होंने अपनी तीखी नजर और निडरता से हजारों पिताओं की गोदी और माताओं के आंचल को उजड़ने से बचा लिया.

 

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