
राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ (BHM) का राष्ट्रव्यापी अभियान, 2010 से पूर्व के शिक्षकों के लिए मांगी विधिक सुरक्षा
उदयपुर। राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ (भारतीय मजदूर संघ) के राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत सोमवार को उदयपुर में राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ (भामस) के प्रदेश संगठन मंत्री एवं संयोजक कमल प्रकाश बाबेल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना और सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णयों के परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता से मुक्त रखने तथा उन्हें नीतिगत व विधिक संरक्षण प्रदान करने की पुरजोर मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिला मंत्री मंगल जैन, जलदाय समन्वय समिति (भामस) के प्रदेश अध्यक्ष व सहसंयोजक संतोष भटनागर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष करण सिंह चौहान, भामस जिला उपाध्यक्ष मुकेश सालवी, कर्मचारी नेता रतन सिंह सिसोदिया, पुरुषोत्तम पराशर और चिकित्सा विभाग अध्यक्ष गोपाल सिंह टांक सहित सैकड़ों कर्मचारी उपस्थित रहे।
सेवा एवं अधिकारों की सुरक्षा: वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन, पेंशन एवं अन्य सभी वैधानिक अधिकारों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए औपचारिक संरक्षण दिया जाए।
RTE अधिनियम में संशोधन: शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम या संबंधित कानूनों में स्पष्ट संशोधन कर 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए विधिक सुरक्षा का प्रावधान जोड़ा जाए।
भविष्य की नियुक्तियों पर ही लागू हो TET: संसद द्वारा स्पष्ट विधायी संशोधन पारित कर यह तय किया जाए कि TET की अनिवार्यता केवल नई व भविष्य की नियुक्तियों पर लागू होगी, पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर नहीं।
प्रदेश संगठन मंत्री कमल प्रकाश बाबेल ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले शिक्षकों के साथ न्याय सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार को संवेदनशीलता, मानवीय दृष्टिकोण और न्यायपूर्ण नीति अपनानी चाहिए।
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