उदयपुर नगर निगम चुनाव : मुस्लिम प्रत्याशियों को मुस्लिम वोट नहीं, हिंदू वोटर्स का जीतना होगा दिल, पैगंबर के मैसेज और अपने अखलाक से देना होगा नफरत का जवाब

उदयपुर। उदयपुर नगर निगम चुनावों में इस बार मुस्लिम प्रत्याशियों के लिए जीत की राह सीधे तौर पर हिंदू मतदाताओं के विश्वास से होकर गुजरती है। किसी भी राजनीतिक दल से मैदान में उतरने वाले मुस्लिम उम्मीदवार केवल अपने समाज के वोटों के दम पर जीत हासिल नहीं कर सकते। उन्हें बहुसंख्यक हिंदू मतदाताओं पर अपना सकारात्मक प्रभाव जमाना होगा। इसके लिए पैगंबर हज़रत मोहम्मद (स.) के पैगाम को आत्मसात करते हुए अपने बेहतरीन ‘अखलाक’ (उच्च आचरण व व्यवहार) के जरिए लोगों के दिलों में जगह बनानी होगी।

ध्रुवीकरण की सियासत और बयानबाजी का सच

आज के दौर में हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत और ध्रुवीकरण की राजनीति को चुनावी हथियार बनाया जाता रहा है। अक्सर चुनाव आते ही वोटों के बिखराव और गोलबंदी के मकसद से विवादित और विभाजनकारी बयान दिए जाते हैं। हाल ही में उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन द्वारा दिया गया बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसे लेकर कई मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया। इस तरह के आक्रामक विरोध से अनजाने में ध्रुवीकरण करने वालों का सियासी मकसद ही पूरा होता है। हालांकि, यह भी एक हकीकत है कि भाजपा की कट्टर विचारधारा से इतर शहर का आम और प्रबुद्ध हिंदू समाज ऐसे विभाजनकारी बयानों से इत्तेफाक नहीं रखता और उसने भी ऐसे रुख का खुलकर विरोध किया है।

परिसीमन का गणित : मुस्लिम वोटों का बिखराव

वार्डों के नए परिसीमन के बाद अधिकांश क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं का गणित बदल चुका है। वोटों के विभाजन के कारण अब किसी भी वार्ड में केवल मुस्लिम मतों के सहारे चुनाव जीतना लगभग नामुमकिन हो गया है। ऐसे में चुनावी जीत सुनिश्चित करने के लिए मुस्लिम प्रत्याशियों को हर हाल में हिंदू बस्तियों में अपनी पैठ बनानी होगी और मतदाताओं का अटूट भरोसा जीतना होगा।

विरोध के बजाय अखलाक से दिल जीतने की सीख

मुस्लिम नेताओं और प्रत्याशियों को केवल बयानबाजी का विरोध करने में उलझने के बजाय अपने आचरण से मिसाल पेश करनी चाहिए:

पैगंबर की तालीम से सबक : हज़रत मोहम्मद (स.) का जीवन सिखाता है कि अपने ऊपर कचरा फेंकने वालों और विरोधियों के साथ भी हमेशा रहमदिली, सब्र और मोहब्बत से पेश आना चाहिए।

अखलाक से बदलाव : जब प्रत्याशी का आचरण और व्यवहार उच्च कोटि का होगा, तो विरोधी भी अपनी सोच और विचार बदलने पर मजबूर हो जाएंगे।

सच्ची जनसेवा : अपने वार्ड में रहने वाले हर हिंदू भाई-बहन के सुख-दुख में शरीक होना, उनकी नागरिक समस्याओं (सड़क, पानी, सफाई, बिजली) के समाधान के लिए सबसे आगे खड़े रहना ही सच्ची नुमाइंदगी है।

नफरत का जवाब नफरत या विरोध से नहीं, बल्कि खिदमत और बेहतर अखलाक से देकर ही सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया जा सकता है और चुनावी जीत का परचम लहराया जा सकता है।

 

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