
उदयपुर / नई दिल्ली। भारतीय नागरिक उड्डयन (Indian Aviation) के इतिहास में 27 जून को एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी अध्याय जुड़ गया। उदयपुर के महाराणा प्रताप हवाई अड्डे पर इंडिगो (IndiGo) एयरलाइंस के एक वाणिज्यिक विमान ने पूरी तरह से भारत में विकसित उपग्रह आधारित नौवहन प्रणाली ‘गगन’ (GAGAN) का उपयोग करते हुए अत्यंत सटीक दृष्टिकोण (Precision Approach) के साथ सुरक्षित टचडाउन (लैंडिंग) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक निष्पादित किया।
विमानन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में इस मील के पत्थर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इस पूरी लैंडिंग के दौरान विदेशों से आयातित किसी भी ग्राउंड-बेस्ड (जमीन पर स्थित) पारंपरिक लैंडिंग गाइडेंस इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ILS – इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) की सहायता नहीं ली गई। यह पूरी प्रक्रिया पूर्णतः स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन पर आधारित थी।
गगन (GAGAN) प्रणाली का आधिकारिक स्वरूप और तकनीकी विकास
‘गगन’ का पूर्ण रूप GPS Aided GEO Augmented Navigation (जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन) है। यह भारत की अपनी उन्नत अंतरिक्ष और विमानन तकनीक का एक साझा परिणाम है:
संयुक्त विकास: इस प्रणाली को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा संयुक्त रूप से राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तहत विकसित किया गया है।
सटीक उपग्रह नेविगेशन: यह प्रणाली भू-स्थैतिक उपग्रहों (Geostationary Satellites) और जमीन पर बने संदर्भ केंद्रों (Reference Stations) के नेटवर्क का उपयोग करके जीपीएस (GPS) संकेतों को परिष्कृत और अत्यंत सटीक बनाती है। इससे विमान के पायलट को ऊर्ध्वाधर (Vertical) और क्षैतिज (Horizontal) दोनों स्तरों पर सटीक मार्गदर्शन मिलता है।
भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए इस सफलता के मायने और लाभ
उदयपुर में किया गया यह सफल परिचालन केवल एक तकनीकी प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारतीय हवाई अड्डों की कार्यप्रणाली को बदलने वाला साबित होगा:
आत्मनिर्भरता और लागत में कमी: अब तक नागरिक विमानों को खराब मौसम या कम दृश्यता (लो विजिबिलिटी) में सुरक्षित उतारने के लिए महंगे विदेशी उपकरणों (जैसे ILS) को हवाई पट्टियों पर स्थापित करना पड़ता था। ‘गगन’ के आने से इस भारी-भरकम आयात लागत और रखरखाव के खर्च से मुक्ति मिलेगी।
छोटे और क्षेत्रीय हवाई अड्डों का कायाकल्प: भारत सरकार की क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना (जैसे उड़ान – UDAN) के तहत विकसित हो रहे छोटे और दूरदराज के हवाई अड्डों पर, जहां महंगे ग्राउंड-बेस्ड उपकरण लगाना व्यावहारिक नहीं है, वहां ‘गगन’ प्रणाली के माध्यम से कम दृश्यता में भी सुरक्षित और नियमित उड़ान संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वैश्विक क्लब में भारत शामिल: इस स्वदेशी तकनीक के सफल व्यावसायिक अनुप्रयोग के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों और क्षेत्रों (जैसे अमेरिका का WAAS, यूरोप का EGNOS और जापान का MSAS) के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी स्वयं की ‘सैटेलाइट-बेस्ड ऑग्मेंटेशन सिस्टम’ (SBAS) तकनीक उपलब्ध है।
इस ऐतिहासिक परीक्षण और सफल लैंडिंग के बाद, महानिदेशक नागरिक उड्डयन (DGCA) के मानकों के अनुरूप आने वाले समय में देश के अन्य वाणिज्यिक विमानों और हवाई अड्डों पर भी गगन आधारित एप्रोच प्रक्रियाओं (LPV – Localizer Performance with Vertical Guidance) को तेजी से लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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