यमुना जल समझौता राजस्थान के लिए ऐतिहासिक क्षण, शेखावाटी क्षेत्र को अब मिल सकेगा यमुना का पानी

जयपुर।

राजस्थान और हरियाणा के बीच दशकों से लंबित यमुना जल परियोजना को लेकर सोमवार को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में एक ऐतिहासिक मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) संपन्न हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण और अंतरराज्यीय जल संसाधन प्रबंधन का एक आदर्श मॉडल माना जा रहा है।

हथिनीकुंड बैराज से बिछेगी 295 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन

लगभग 34,102 करोड़ रुपये की लागत वाली इस भारी-भरकम परियोजना से राजस्थान की जल सुरक्षा को एक नया और मजबूत आधार मिलेगा।

  • तीन भूमिगत पाइपलाइनें: राजस्थान के हिस्से का पानी हथिनीकुंड बैराज से लगभग 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के माध्यम से चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा।

  • आधुनिक बुनियादी ढांचा: इस पूरी परियोजना के तहत तीन भूमिगत पाइपलाइनें, एक निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।

  • डीपीआर को मंजूरी: राजस्थान सरकार द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) केंद्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है। वहीं, हरियाणा सरकार ने पाइपलाइन अलाइनमेंट को अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इस पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण और संचालन के लिए ‘राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर एसपीवी’ का गठन किया जाएगा।

32 साल पुराना इंतजार हुआ खत्म

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि इस समझौते से हरियाणा और राजस्थान के लोगों की करीब 3 दशक पुरानी जल समस्या का स्थायी समाधान हो गया है। उन्होंने बताया कि समझौते में वित्तीय जिम्मेदारी, लागत साझीकरण, जल आवंटन, जल छोड़ने के प्रोटोकॉल, बुनियादी ढांचे के संचालन, पारदर्शिता और विवाद समाधान की प्रक्रियाओं को बेहद वैज्ञानिक और बारीक तरीके से समाहित किया गया है, जिससे यह आने वाले दशकों तक विवादहीन रहेगा।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने बताया कि वर्ष 1994 में ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों के समझौते के तहत राजस्थान को ताजेवाला हेड पर 1917 क्यूसेक जल आवंटित किया गया था। लेकिन किसी ठोस प्रवाह प्रणाली के अभाव में 32 वर्षों तक राजस्थान इस पानी का उपयोग नहीं कर पाया।

इन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ: इस भूमिगत पाइपलाइन के जरिए राजस्थान के चूरू, सीकर, झुंझुनूं (शेखावाटी क्षेत्र) सहित अन्य जल संकट वाले क्षेत्रों को पेयजल की दीर्घकालिक पूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही ऊपरी यमुना बेसिन की भंडारण परियोजनाओं के पूरे होने पर सिंचाई की आवश्यकताओं को भी चरणबद्ध रूप से पूरा किया जाएगा।

डबल इंजन सरकार की शक्ति से दशकों पुराना प्रोजेक्ट हुआ साकार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील सोच के कारण ही यह दशकों से अटका हुआ समझौता आज मूर्त रूप ले सका है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार का मतलब ही बिना विलंब के निर्णय और बिना बाधा के क्रियान्वयन है।

  • दोनों राज्यों को होगा फायदा: इस पाइपलाइन के माध्यम से न केवल राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को पानी मिलेगा, बल्कि हरियाणा के भी 10 स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।

  • हरियाणा में खुलेंगी विकास की राहें: परियोजना के तहत बनने वाली निरीक्षण सड़क से हरियाणा में विकास की नई राहें खुलेंगी, साथ ही राजस्थान के हंसियावास में बनने वाले जलाशय से हरियाणा के निवासियों को भी पेयजल का लाभ मिलेगा।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मौके पर कहा कि बारिश के पानी को पाइपलाइन के माध्यम से हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान ले जाया जाएगा, जिसका उपयोग पेयजल के रूप में होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति तक पानी की पहुंच सुनिश्चित करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है और इस परियोजना को पूरी तरह साकार करने में हरियाणा सरकार राजस्थान को अपना शत-प्रतिशत सहयोग देगी।

इस ऐतिहासिक एमओए के दौरान राजस्थान और हरियाणा के मुख्य सचिवों सहित दोनों राज्यों के जल संसाधन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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