
भूपाल नोबल्स में सैनिक स्कूल खुलने का मार्ग हुआ प्रशस्त
फोटो : कमल कुमावत
उदयपुर। शिक्षा व्यवस्था की मजबूती का आधार शिक्षक होता है। शिक्षक को समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाना चाहिए, क्योंकि इतिहास इस बात का साक्षी है कि शिक्षकों ने अनेक बार सामाजिक परिवर्तनों की नींव रखी है। जो झुकना जानता है, वही उठना भी जानता है। शिक्षा को सम्मान देने से शिक्षा स्वयं विकास का पर्याय बन जाती है।
ज्ञान के समुचित उपयोग के लिए विवेक अनिवार्य है। विवेकयुक्त ज्ञान ही कल्याणकारी होता है, अन्यथा वही ज्ञान विनाश का कारण भी बन सकता है। विवेक का विकास व्यक्ति के भीतर आवश्यक है। विद्यार्थियों को कैसे सोचना है और सर्वांगीण दृष्टिकोण कैसे विकसित करना है, इस दिशा में विश्वविद्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ये विचार शुक्रवार को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भूपाल नोबल्स विद्या प्रचारिणी सभा के 104वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भावी पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। शिक्षा वही सफल मानी जाती है जो धर्म को धारण कराए। यहां धर्म का तात्पर्य किसी संप्रदाय से नहीं, बल्कि उस दायित्वबोध और चेतना से है जो मानव चरित्र का निर्माण करती है।

शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, संवेदनाओं तथा आंतरिक गुणों और शक्तियों के विकास का साधन है। आस्था और विश्वास के बल पर जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान संभव है।
अहंकार से मुक्त मन से ही सच्ची सफलता – राजनाथ सिंह
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मनुष्य केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से विभूषित होता है। जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त करने के लिए मन को अहंकार से मुक्त करना आवश्यक है। अहंकार रहित मन से ही अनंत सुख और परमानंद की अनुभूति संभव है।
नई शिक्षा नीति – परंपरा और आधुनिकता का संगम
राजनाथ सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के साथ परंपरागत ज्ञान तथा आधुनिक शिक्षा का संतुलित समन्वय है। भारत का अतीत अत्यंत समृद्ध रहा है और हमारी परंपराएं तथा सांस्कृतिक धरोहर अपने आप में पूर्ण हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा जीवन में ऐसा संतुलन प्रदान करती है, जिससे ज्ञान केवल बौद्धिक नहीं बल्कि जीवनोपयोगी भी बनता है।
नई शिक्षा नीति में मल्टीडिसिप्लिनरी और इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण को अपनाकर विचारशील, संवेदनशील और चरित्रवान पीढ़ी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है, जो समाज की समस्याओं का समाधान कर सके।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम
रक्षा मंत्री ने कहा कि स्थापना दिवस भविष्य को उत्कृष्ट बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक होता है। उन्होंने संस्थान की विकास यात्रा, संघर्षों और स्थापना काल की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए जीवन के लक्ष्यों के प्रति समर्पण की आवश्यकता पर बल दिया। संस्थान विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है।
महाराणा भूपाल सिंह के योगदान को किया स्मरण
राजनाथ सिंह ने महाराणा भूपाल सिंह द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान और साक्षरता बढ़ाने के प्रयासों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भूपाल सिंह का शौर्य और राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि थी तथा उनके लिए राष्ट्र सर्वोच्च स्थान पर था।
नवाचार, अनुसंधान और एआई के युग में शिक्षा
चौथी औद्योगिक क्रांति, तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में शिक्षा में नवाचार और अनुसंधान को शामिल करना आवश्यक है। विद्यार्थियों में निरंतर सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना समय की मांग है। आज के विद्यार्थी केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार के सह-निर्माता हैं। मन को व्यापक और उदार बनाने से ही परम आनंद की अनुभूति संभव है।
समारोह से पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संस्थान परिसर में स्थापित महाराणा भूपाल सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा गुलाब कली भेंट कर स्वागत किया गया तथा एनसीसी कैडेट्स ने गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया।
प्रारंभ में कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज विश्व युद्ध कौशल और तकनीक के संक्रमण काल से गुजर रहा है। पारंपरिक युद्धों के स्थान पर अब युद्ध का स्वरूप हार्डवेयर से सॉफ्टवेयर की ओर तेजी से परिवर्तित हो रहा है, जहां साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका निरंतर बढ़ रही है। ऐसे समय में रक्षा मंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन किया है और आज आयातक से निर्यातक राष्ट्र बनने की दिशा में सशक्त पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल सैन्य शक्ति का विस्तार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार करने की दिशा में मजबूत कदम है। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण से न केवल देश की सुरक्षा सुदृढ़ हुई है, बल्कि युवाओं के लिए नवाचार, अनुसंधान और रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
प्रो. सारंगदेवोत ने संस्थान के निर्माण और विकास में योगदान देने वाले सभी पूर्वजों, शिक्षाविदों और पुरोधाओं का स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र सेवा, संस्कार और चरित्र निर्माण को सदैव अपने मूल उद्देश्य के रूप में अपनाया है।
मेवाड़ की गौरवशाली देशभक्ति परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस भावनात्मक विरासत को युवा पीढ़ी में व्यवहारिक रूप से स्थानांतरित करना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने रक्षा मंत्री के समक्ष मेवाड़ क्षेत्र में सैनिक विद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव रखा, जिससे युवाओं में अनुशासन, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा की भावना सुदृढ़ हो सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे संस्थानों से देश को समर्पित, सक्षम और चरित्रवान नागरिकों की पीढ़ी प्राप्त होगी।
प्रधान संरक्षक एवं अध्यक्ष महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने संस्थान की स्थापना में महाराणा भूपाल सिंह के अमूल्य योगदान को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भूपाल सिंह ने अपने कार्यकाल में पुस्तकों और ज्ञान के माध्यम से आधुनिक शिक्षा, नवाचार और व्यापक शैक्षिक सुधारों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों में कौशल आधारित शिक्षा, महिला शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कृषि आधारित शिक्षा, प्रायोगिक प्रशिक्षण तथा विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति जैसी दूरदर्शी योजनाएं शामिल थीं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता से पूर्व की व्यवस्थाओं में समयानुकूल सुधार आवश्यक था, जिसे भूपाल सिंह ने भली-भांति समझा और शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। महापुरुषों के विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। शिक्षा के माध्यम से समाज को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना ही उनके प्रयासों का मूल उद्देश्य था।

राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका अहम – सी.पी. जोशी
विशिष्ट अतिथि चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी ने कहा कि यह संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान के विद्यार्थी देश-विदेश में विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, राष्ट्रभक्ति और संस्कारों का समन्वय ही सशक्त भारत की नींव रखता है।
रक्षा और राष्ट्र सेवा में योगदान का उल्लेख
विशिष्ट अतिथि शिक्षाविद एवं समाजसेवी अनिल सिंह ने देश की रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों में रक्षा मंत्री की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उनके दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सशक्त नेतृत्व से ही देश की सुरक्षा और विकास दोनों को मजबूती मिलती है।
समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और भावी पीढ़ियों के निर्माण का सशक्त आधार है। ऐसे आयोजन शिक्षा के मूल उद्देश्यों की पुनः स्मृति कराते हुए नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते हैं।
इनको नवाजा गया अवार्ड से:
प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़ ने बताया कि संस्थान के विकास में योगदान देने के लिए 102 वर्षीय उदय सिंह पुरावत, तेज सिंह शक्तावत, रावत मनोहर सिंह कृष्णावत, गुणवंत सिंह झाला, प्रदीप सिंह सांगावत, कृष्ण सिंह सारंगदेवोत, चंद्रगुप्त सिंह चौहान, लाल सिंह झाला को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया गया। वहीं खेलों में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए कार्तिकी सिंह शक्तावत और अपूर्वी चंदेला को बीएन प्राइड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
फतह आर्ट गैलरी का हुआ लोकार्पण
प्रबंध निदेशक मोहब्बत सिंह राठौड़ ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं सम्मानित अतिथियों द्वारा प्रशासनिक भवन में निर्मित फतह आर्ट गैलरी का लोकार्पण किया गया, जिसमें फतह सिंह से संबंधित चित्रों एवं ऐतिहासिक प्रसंगों का प्रदर्शन किया गया है।
भूपाल नोबल्स में सैनिक स्कूल खुलने का मार्ग प्रशस्त
समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संस्थान द्वारा सैनिक स्कूल खोलने के लिए जो आवेदन प्रस्तुत किया गया है, उसके सभी प्रारूप सही पाए गए हैं और वे व्यक्तिगत रूप से इस दिशा में पूरा सहयोग करेंगे।
रक्षा मंत्री ने दिखाई सहजता
अवार्ड से सम्मानित 102 वर्षीय विभूति सहित अन्य सम्मानितजनों को सम्मानित करने के लिए रक्षा मंत्री स्वयं मंच से नीचे उतरकर उनके पास पहुंचे।
देश में अमन-शांति के लिए हुआ हवन पूजन
समारोह से पूर्व प्रातः 7 बजे प्रशासनिक भवन के सभागार में पंडितों के मंत्रोच्चारण के साथ प्रो. दरियाव सिंह चूंडावत एवं गजेंद्र सिंह शक्तावत के सान्निध्य में हवन पूजन संपन्न हुआ।
इस अवसर पर सलूंबर विधायक शांता मीणा, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह, देहात अध्यक्ष पुष्कर तेली, फतह सिंह राठौड़, भंवर सिंह पंवार, प्रमोद सामर, प्रो. दरियाव सिंह चूंडावत, राजेंद्र सिंह ताणा, शक्ति सिंह कारोही, हनुमंत सिंह बोहेड़ा, नवल सिंह जुड, डॉ. युवराज सिंह राठौड़, कमलेश्वर सिंह सारंगदेवोत, करण सिंह उमरी, कुलदीप सिंह ताल, भंवर सिंह कोठारिया, सुरेंद्र प्रताप सिंह रूद, महेंद्र सिंह पाखंड, महेंद्र सिंह पाटिया, कुलपति डॉ. चेतन सिंह चौहान, रजिस्ट्रार डॉ. एन.एन. सिंह राठौड़, प्रो. एकलिंग सिंह झाला, डॉ. रेणु राठौड़, भानु प्रताप सिंह, एडवोकेट सुशील कुमार, राज्यपाल सलाहकार प्रो. कैलाश सोडाणी सहित शहर के गणमान्य नागरिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं शिक्षा जगत से जुड़े अनेक लोग तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिता राठौड़ ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मोहब्बत सिंह रूपाखेड़ी ने किया।
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