अपनों के बीच से अचानक उठा एक साया : झाड़ोल थानाधिकारी बुद्धराम बिश्नोई की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत

उदयपुर। जीवन कब, कहां और किस मोड़ पर थम जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। वर्दी की शान और फर्ज की खातिर हमेशा मुस्तैद रहने वाले उदयपुर के झाड़ोल थानाधिकारी बुद्धराम बिश्नोई की बुधवार देर रात एक भीषण सड़क हादसे में असमय मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल एक हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि महकमे में भी मातम का सन्नाटा पसर गया है।

बुद्धराम बिश्नोई हाल ही में जोधपुर हाईकोर्ट में एक मामले की पेशी में शामिल होने गए थे। अदालत की तारीख और अपने पेशेवर कर्तव्यों को निभाकर वे अपने निजी वाहन से वापस उदयपुर लौट रहे थे। कौन जानता था कि जोधपुर के चामू थाना क्षेत्र की यह सर्द रात उनके जीवन की आखिरी रात साबित होगी।

रात के करीब 12 बजे जब उनकी गाड़ी चामू क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी सड़क किनारे खड़े एक ट्रैक्टर-ट्रॉली से उनकी कार की भीषण टक्कर हो गई। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई कि रात के अंधेर में सामने से आ रही किसी वाहन की तेज हेडलाइट सीधे उनकी आँखों पर पड़ी, जिससे पलक झपकते ही यह अनहोनी हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का बोनट और छत उड़ गए।

अपनों से दूर, अपनों की यादों में हमेशा के लिए अमर

मूल रूप से चामू के ही रहने वाले बुद्धराम बिश्नोई का बांसवाड़ा से तबादला होकर महज दो महीने पहले ही उदयपुर के झाड़ोल थाने में बतौर थानाधिकारी हुआ था। अभी उन्होंने नई जगह पर अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से संभाला ही था कि कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जिस माटी में उनका जन्म हुआ था, वहीं की सड़कों पर वे চিরविदाई (अंतिम विदाई) ले गए।

इस भीषण दुर्घटना में उनके साथ मौजूद ड्राइवर कांस्टेबल भी गंभीर रूप से घायल हो गया, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। चामू के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में जब उनका शव रखा था, तो वहां मौजूद हर शख्स की आँखें नम थीं। एक खाकी पहनने वाला जांबाज अफसर, जो कल तक दूसरों की सुरक्षा के लिए जागता था, आज खामोश सो चुका है। उनकी यह विदाई झकझोर देने वाली है, और उनका यूं चले जाना परिवार के साथ-साथ पूरे पुलिस प्रशासन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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