उदयपुर: डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने निभाई विद्यादान की परम्परा, राजकीय बालिका विद्यालय की छात्राओं का भरा वार्षिक शुल्क

वर्ष 2023 से निरंतर जारी है पहल; 162 वर्ष पुरानी ‘शम्भूरत्न पाठशाला’ की छात्राओं को मिला बालिका शिक्षा का संबल

उदयपुर (5 अगस्त 2026): मेवाड़ की गौरवशाली विद्यादान परम्परा का निर्वहन करते हुए मेवाड़ के 77वें श्री एकलिंग दीवान डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने उदयपुर के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, जगदीश चौक की छात्राओं की सम्पूर्ण वार्षिक शुल्क राशि का स्वयं वहन किया है। वर्ष 2023 से निरंतर जारी यह पहल बालिका शिक्षा के प्रति उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

“बालिका शिक्षा ही सशक्त समाज की वास्तविक आधारशिला”

इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर बल दिया।

उन्होंने कहा:

“बालिका शिक्षा ही सशक्त समाज की आधारशिला है। हाल ही में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की बेटियों ने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का गौरव बढ़ाया है। हालांकि, आज भी अनेक बालिकाएं परिस्थितियोंवश पढ़ाई छोड़ देती हैं, जिन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर ही राष्ट्र की प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।”

विभिन्न सामाजिक सरोकारों में सक्रिय योगदान

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ अपने पूर्वजों की परम्पराओं का निर्वहन करते हुए शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, पशु कल्याण, शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं व पूर्व सैनिकों के कल्याण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। वे ‘गो ग्रीन’ और ‘सेव वाटर’ अभियानों के माध्यम से जनजागरूकता फैला रहे हैं, जिसके लिए उनके नाम कई विश्व कीर्तिमान (Guinness World Records) भी दर्ज हैं।

162 वर्ष पुराना है विद्यालय का ऐतिहासिक महत्व

विद्यालय की प्राचार्या दुर्गेश कुमारी शर्मा ने बताया कि डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ऐतिहासिक विद्यादान परम्परा को सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं।

  • इतिहास: 162 वर्ष पूर्व मेवाड़ के 71वें श्री एकलिंग दीवान महाराणा शम्भूसिंह जी (1861-1874 ई.) के शासनकाल में वर्ष 1864 में उदयपुर राज्य का पहला विद्यालय ‘शम्भूरत्न पाठशाला’ स्थापित किया गया था।

  • कन्या विद्यालय: वर्ष 1866 में इसे कन्या विद्यालय के रूप में विकसित किया गया, जो मेवाड़ रियासत द्वारा स्थापित भारत के शुरुआती कन्या विद्यालयों में से एक माना जाता है।

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