परदे के पीछे : पांचवीं बार का जनमत, शहर की धड़कन और नगर निगम का शोमैन, क्या पारस सिंघवी के दौर में बदलेगा दीपावली मेले का अंदाज़?

फोटो-वीडियो एंड रिपोर्ट : कमल कुमावत

उदयपुर। फिल्म जगत में जब कोई निर्देशक पांच दशक तक दर्शकों की रग-रग से वाकिफ रहने के बाद किसी बड़े प्रोजेक्ट की कमान सीधे अपने हाथ में लेता है, तो सिनेमा के परदे पर सिर्फ तस्वीरें नहीं बदलतीं, कहानी की रूह बदल जाती है। उदयपुर नगर निगम के ऐतिहासिक प्रांगण में 28 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे 15 दिवसीय पारंपरिक ‘दीपावली मेला 2026’ की बिसात पर इस बार कुछ ऐसा ही दृश्य उभर रहा है।

इस बार मेले का केंद्रबिंदु और कमान सीधे उस शख्स के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिसने नगर निगम की दहलीज पर अपनी ज़िंदगी के दशकों बिताए हैं—महापौर पारस सिंघवी। पांचवीं बार पार्षद चुनकर आने का रिकॉर्ड अपने आप में एक पूरी दास्तान कहता है। यह कोई चुनावी तुक्का नहीं, बल्कि शहर की संकरी गलियों, चौराहों की चाय की थड़ियों, निगम की फाइलों और आम जनता के सुख-दुख से जुड़े रहने का वह जीवंत तजुर्बा है, जो किसी भी नेता को प्रशासनिक मुखिया से आगे बढ़ाकर शहर का ‘अभिभावक’ बना देता है।

जब कमान उस हाथ में हो, जो जनता और मेले की नब्ज़ पहचानता है

नगर निगम के टाउनहॉल में जब रोशनी की लदियां सजती हैं और मेले का नगाड़ा बजता है, तो एक आम अफ़सर या नौसिखिया राजनीतिज्ञ के लिए यह केवल ठेकों, दुकानों और सुरक्षा घेरों का एक सालाना रुटीन होता है। मगर पांच मर्तबा जनता की अदालत से जीतकर महापौर की कुर्सी तक पहुंचे पारस सिंघवी के लिए यह मेला महज एक आयोजन नहीं, उदयपुर के सामूहिक जनजीवन की नब्ज़ है।

वे बखूबी जानते हैं कि इस मेले में आने वाला हर परिवार किसी बड़े मल्टीप्लेक्स या महंगे मॉल का रुख नहीं कर सकता। यहां मध्यमवर्ग अपनी सालभर की थकान मिटाने आता है, बच्चे लकड़ी के खिलौनों और झूलों में अपनी खुशियां ढूंढते हैं, और औरतें घरेलू बर्तनों व कपड़ों की दुकानों पर मोलभाव करते हुए त्योहारी उमंग महसूस करती हैं। मंगलवार को जब प्रेस वार्ता में उन्होंने दुकानों से ₹1.01 करोड़ और झूलों से ₹85 लाख यानी कुल ₹1.86 करोड़ के मुनाफे का खाका रखा, तो यह केवल खजाने की गिनती नहीं थी, बल्कि यह भरोसा था कि व्यवस्थाओं पर खर्च होने वाला एक-एक पैसा जनता की सहूलियत में तब्दील होगा।

बड़ा सवाल: क्या मेले का संचालन इस बार सचमुच अलग होगा?

सिनेमा का जानकार दर्शक जब किसी मंझे हुए निर्देशक की फिल्म देखने जाता है, तो टिकट खिड़की पर ही सवाल दागता है—क्या इस बार कुछ नया देखने को मिलेगा, या फिर वही पुरानी रवायत नए रैपर में पेश कर दी जाएगी?

उदयपुर की जनता की निगाहें भी आज महापौर पारस सिंघवी पर इसी सवाल के साथ टिकी हैं। क्या पांच बार के पार्षद का यह गहरा तजुर्बा मेले को एक अलग गरिमा और नया अंदाज़ दे पाएगा?

प्रेस वार्ता में जो रूपरेखा उन्होंने सामने रखी, उसमें इस बदले हुए मिज़ाज की झलक साफ दिखाई देती है:

प्रयोग करने का साहस : पुरानी लीक को तोड़ते हुए 1 नवंबर को पहली बार ‘स्टैंडअप कॉमेडी नाइट’ को मेले का हिस्सा बनाया गया है, जहां गौरव गुप्ता की हास्य-व्यंग्य की महफिल युवाओं और परिवारों को एक नई ताजगी देगी।

सुरों और लोक-संस्कृति का संतुलन : 28 अक्टूबर को अनामिका अंबर और छोटू सिंह रावणा की भक्तिमयी लहर, 29 को ‘रेपरिया बालम’ व ‘फकीरा खान’ का देसी फ्यूजन, 30 अक्टूबर को बॉलीवुड गायिका पलक मुच्छल की मखमली शाम और 3 नवंबर को शैलेश लोढ़ा के तेवरों से सजा कवि सम्मेलन—यह बताता है कि कार्यक्रम तय करते वक्त शहर के हर मिज़ाज और उम्र का ध्यान रखा गया है।

मिट्टी के कलाकारों को सम्मान: अक्सर बड़े सितारों की चमक में स्थानीय हुनर खो जाता है, लेकिन शहर की नस-नस से वाकिफ मेयर ने 7 सांस्कृतिक रातों में से पूरे 2 दिन विशुद्ध रूप से स्थानीय कलाकारों के नाम सुरक्षित रखकर ज़मीनी जुड़ाव का परिचय दिया है।

तजुर्बे की असली कसौटी : व्यवस्था, सुरक्षा और आम आदमी का सुकून

किसी भी भव्य मंच की सफलता इस बात से तय नहीं होती कि वीआईपी दीर्घा में कितने सोफे लगे हैं; वह इस बात से आंकी जाती है कि आम दर्शक दीर्घा में खड़ा सबसे साधारण नागरिक कितना सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है।

21 कमेटियों का गठन, वाटरप्रूफ पंडाल, फायर ब्रिगेड के लिए ऊंचे स्वागत द्वार, सीसीटीवी की तीसरी आंख और पहली बार कराया गया दुर्घटना बीमा—कागजों पर पटकथा बेहद मजबूत और मुकम्मल नजर आती है। मगर असली इम्तिहान 28 अक्टूबर की शाम से शुरू होगा, जब टाउनहॉल का मुख्य द्वार आम जनता के लिए खुलेगा।

क्या बुजुर्गों को बैठने की जगह मिल पाएगी? क्या महिलाएं बिना किसी असहजता के स्टॉलों पर घूम सकेंगी? क्या टाउनहॉल के आसपास लगने वाले जाम से आम शहरवासी को निजात मिलेगी?

जब शहर की नब्ज़ जानने वाला शख्स खुद ड्राइविंग सीट पर बैठा हो, तो जनता की उम्मीदें भी आसमान छूने लगती हैं। उदयपुर अब यह देखने के लिए सांस रोके खड़ा है कि पाँचवीं बार के इस जनप्रतिनिधि का विशाल अनुभव क्या वाकई इस दीपावली मेले को एक यादगार, अनुशासित और रूहानी उत्सव में बदल पाता है, या फिर यह भी चंद दिनों की आतिशबाजी के बाद बिसर जाने वाला एक आम जलसा बनकर रह जाएगा।

मेले की संपूर्ण जानकारी यहां पढ़िए

मेला संयोजक प्रमोद सामर ने बताया कि इस वृहद आयोजन को चाक-चौबंद रूप से संचालित करने के लिए कुल 21 अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है। प्रशासनिक समिति की अध्यक्षता स्वयं महापौर पारस सिंघवी कर रहे हैं, जिसमें आयुक्त एवं प्रभारी अधिकारी अभिषेक खन्ना, उपमहापौर दिनेश भट्ट, उपायुक्त हरी सिंह देवल, मुख्य लेखाधिकारी बाबूलाल बंजारा सहित 31 अन्य अधिकारियों व पार्षदों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलाकारों के चयन में विशेष संतुलन साधने के लिए श्रीमती निधि गोधा व साथी पार्षदों के साथ अनुभवी विशेषज्ञों को जोड़ा गया, वहीं प्रतिदिन आमंत्रित होने वाले अतिथियों की रूपरेखा अतिथि समिति अध्यक्ष आशीष कोठारी द्वारा तय की गई है।

व्यवस्थाओं की माइक्रो-प्लानिंग: पंडाल, सुरक्षा, पार्किंग और सहूलियतें
नगर निगम प्रशासन ने मेले में उमड़ने वाली लाखों की भीड़ की सुगमता के लिए विभिन्न समितियों के माध्यम से व्यापक बंदोबस्त किए हैं:

पंडाल, दीर्घा व सिटिंग (अध्यक्ष योगेश कुमावत): सांस्कृतिक संध्याओं के लिए भव्य वाटरप्रूफ विशाल डोम और स्टेज तैयार किया जा रहा है। इसमें प्रेस दीर्घा, वीआईपी दीर्घा, सामान्य दर्शक दीर्घा तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कैमरों के लिए अलग से मजबूत मचान की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा के मद्देनजर बैरिकेड्स पर मजबूत जालियां लगाई गई हैं। दुकानों का लेआउट इस तरह रखा गया है कि आवागमन में भगदड़ जैसी स्थिति न बने।

निमंत्रण एवं जनसंपर्क (अध्यक्ष अतुल चंडालिया): शहर के हर वर्ग की रुचि के अनुसार तारीखवार विस्तृत निमंत्रण पत्र तैयार करवाए गए हैं, जो वरिष्ठ नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, प्रशासनिक महकमों और गणमान्य नागरिकों तक सम्मानपूर्वक पहुंचाए जा रहे हैं।

सफाई व्यवस्था व अग्निशमन (अध्यक्ष प्रदीप विजयवर्गीय): 24 घंटे मेला स्थल को स्वच्छ रखने के लिए अलग-अलग सफाई टीमें तैनात की गई हैं। जगह-जगह कचरा पात्र रखे गए हैं। आपात स्थिति में दमकल (फायर ब्रिगेड) वाहनों के निर्बाध प्रवेश और निकासी के लिए सभी स्वागत द्वारों (गेट्स) की ऊंचाई विशेष रूप से अधिक रखी गई है।

सुरक्षा एवं बीमा (अध्यक्ष सतीश शर्मा): मेले में किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। आयोजन स्थल के नक्शानुसार पुलिस बल, होमगार्ड और निजी सुरक्षा गार्ड्स के साथ-साथ बड़ी संख्या में महिला सुरक्षा गार्ड व महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगी। इसके साथ ही निगम ने पूरे मेले का विधिवत दुर्घटना बीमा भी करवाया है।

कंट्रोल रूम व तीसरी आंख (अध्यक्ष पंकज बोराणा): संपूर्ण प्रांगण पर पल-पल की निगरानी रखने के लिए आधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जो हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी रखेगा।

प्रचार-प्रसार व लाइव प्रसारण (अध्यक्ष जितेंद्र सिंह शक्तावत): प्रांगण में विभिन्न स्थानों पर बड़े एलईडी प्रोजेक्टर लगाए जा रहे हैं, ताकि पीछे खड़े दर्शक भी मुख्य मंच की प्रस्तुतियों का सीधा प्रसारण देख सकें।

स्टॉल व झूले (अध्यक्ष जतिन श्रीमाली): टाउनहॉल के सामने वाले मुख्य मैदान में रोमांचक झूले तथा दक्षिणी एवं पिछले हिस्से में लजीज व्यंजनों और घरेलू उत्पादों की दुकानें सजाई गई हैं।

विद्युत व्यवस्था व जनरेटर (अध्यक्ष विजय आहूजा): निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए भारी क्षमता वाले साइलेंट जनरेटर स्थापित किए गए हैं, ताकि बिजली गुल होने पर भी कार्यक्रम में खलल न पड़े।

सजावट व मंच सज्जा (संयोजक वैभव भंडारी व हितांशी शर्मा): पूरे निगम परिसर को रंग-बिरंगी सीरीज, एलईडी व ट्यूबलाइट्स से जगमग किया गया है और मुख्य मंच को प्रतिदिन के कार्यक्रम के मिजाज के अनुरूप कलात्मक रूप दिया जा रहा है।

ट्रैफिक व पार्किंग (अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सिसोदिया): मेले में आने वाले दर्शकों के वाहनों के लिए टाउनहॉल की नवनिर्मित बहुमंजिला पार्किंग, श्रमजीवी कॉलेज मैदान तथा आरसीए लिंक रोड पर व्यवस्थित पार्किंग स्थल तय किए गए हैं।

पेयजल एवं चिकित्सा (अध्यक्ष अशोक नागदा व नरेश वैष्णव): आगंतुकों के लिए शुद्ध ठंडे पेयजल की सुचारू आपूर्ति रहेगी। साथ ही किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल के लिए चिकित्सा विभाग के समन्वय से जीवनरक्षक उपकरणों से लैस एम्बुलेंस और मेडिकल टीम हर समय मौके पर तैनात रहेगी।

स्वागत एवं अल्पाहार (अध्यक्ष यशवंत आंचलिया व महेश पुरी गोस्वामी): मंच पर पधारने वाले अतिथियों की सूचना समन्वय का दायित्व यशवंत आंचलिया संभाल रहे हैं, जबकि विशिष्ट अतिथियों के औपचारिक आतिथ्य की कमान श्रीमती मीनल कंठालिया को सौंपी गई है। अतिथियों और कलाकारों के लिए अल्पाहार की उच्चस्तरीय व्यवस्था की गई है।

प्रेस एवं मीडिया (अध्यक्ष प्रताप सिंह राठौड़): मेले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधि, फोटो और प्रेस विज्ञप्तियों को समय पर प्रसारित करने के लिए प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों के लिए विशेष मीडिया सेंटर और समन्वय तंत्र तैयार किया गया है।

 

(Visited 141 times, 141 visits today)

About Author

Leave a Reply