
उदयपुर (स्रोत : द ट्रिब्यून/आईएएनएस)।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हालिया कूटनीतिक यात्रा उदयपुर और पूरे मेवाड़ के लिए बड़े गौरव का क्षण लेकर आई है। पीएम मोदी ने यूएई के क्राउन प्रिंस को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में उदयपुर की प्रसिद्ध पारंपरिक ‘कोफ्तगारी’ (Koftgari) कला से सुसज्जित एक औपचारिक डैगर (तलवार/खंजर) भेंट की है।
इस शाही तोहफे के बाद उदयपुर की सदियों पुरानी धातु शिल्प कला और इसे जीवित रखने वाले स्थानीय कारीगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए हैं।
सिकलीगर कारीगरों की कला का मुरीद हुआ वैश्विक मंच
यूएई के क्राउन प्रिंस को भेंट की गई यह विशेष तलवार उदयपुर के पारंपरिक ‘सिकलीगर’ (Sikligar) कारीगरों द्वारा बेहद बारीकी से तैयार की गई है। इस कला के तहत फौलाद (Steel) के ऊपर सोने और चांदी के पतले तारों से बेहद जटिल और आकर्षक नक्काशी (Inlay work) की जाती है।
कूटनीतिक नजरिए से भी यह तोहफा बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि यह मेवाड़ की वीरता के प्रतीक और अमीराती संस्कृति की पारंपरिक ‘खंजर’ परंपरा (जो साहस, प्रतिष्ठा और शाही विरासत को दर्शाती है) के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु का काम करता है।
कूटनीति के मंच पर ‘मेक इन इंडिया’ और वोकल फॉर लोकल
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इस यात्रा के दौरान विदेशी शासकों को भारत की हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया। जहां एक ओर यूएई के राष्ट्रपति को गुजरात की रोगन पेंटिंग और जीआई टैग केसर आम दिए गए, वहीं क्राउन प्रिंस के लिए उदयपुर की इस ऐतिहासिक तलवार के साथ बिहार का ‘मिथिला मखाना’ भी शामिल था। इसके अलावा यूएई की क्वीन मदर को करीमनगर की चांदी की चेस्ट और मध्य प्रदेश का महेश्वरी सिल्क दिया गया।
उदयपुर के हस्तशिल्प उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय विशेषज्ञों और कला प्रेमियों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा उदयपुर की कोफ्तगारी कला को इतने बड़े वैश्विक मंच पर सम्मान देने से स्थानीय हस्तशिल्प को नई पहचान मिलेगी। इससे न केवल दम तोड़ती प्राचीन कलाओं को नया जीवन मिलेगा, बल्कि आने वाले समय में उदयपुर के इन पारंपरिक उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग और पर्यटन क्षेत्र को भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
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