
उदयपुर। अंजुमन तालीमुल इस्लाम, उदयपुर ने एक अहम और नुमाया पेशक़दम करते हुए पहली बार ख़वातीन विंग अंजुमन रिफअत उन्नीसा (अंजुमन निसा) के क़ियाम का ऐलान किया है। इस पहल को अंजुमन की तरफ़ से “तारीखी” क़दम बताया जा रहा है, लेकिन शहर के हलक़ों में यह सवाल भी उतनी ही तेजी से उठ रहा है कि क्या अंजुमन अपने अंदरूनी मसाइल, छोटी-छोटी रुकावटें और आपसी नाइत्तफ़ाक़ी दूर किए बग़ैर इस नए इदारती ढांचे को कामयाबी से चला पाएगी?
बड़ी बैठक : बैकग्राउंड में कई अनकहे मसाइल
एक खास बैठक में डॉक्टर, प्रोफेसर, उस्तानियां, एडवोकेट्स, बिज़नेस women, रिटायर्ड मुलाज़िमात और समाजी शोबों से वाबस्ता ख़वातीन की बड़ी मौजूदगी रही। तालीम-ओ-तरबियत, ख़वातीन के हुक़ूक़, कौशल-ए-तरक़्की और समाजी जिम्मेदारियों पर गुफ़्तगू हुई और सर्वसम्मति से ख़वातीन विंग के क़ियाम का फैसला किया गया।
लेकिन दूसरी तरफ़ यह भी कोई राज़ नहीं कि अंजुमन कुछ दिनों से छोटे-छोटे इदारती मसाइल, ग़ैरज़रूरी रस्साकशी, और तनाज़आत में उलझी हुई है।
लोगों का कहना है कि—
• फ़ैसलों में ताख़ीर,
• राब्ते की कमी,
• ज़िम्मेदारान के दरमियान हल्की रंजिशें,
• और मामूली बातों पर खींचतान—
ये बातें अंजुमन की पेशक़दमी को पहले ही मुतास्सिर कर चुकी हैं।
पहल काबिल-ए-तारीफ, लेकिन अमली शक्ल कितनी मजबूत होगी?
अंजुमन का दावा है कि नया ख़वातीन विंग तालीम, तरबियत, सेल्फ-डिफ़ेन्स, हेल्थ अवेयरनेस, घरेलू मसाइल के हल और कम्युनिटी बिल्डिंग पर संगठित तरीके से काम करेगा।
मगर शहर के दानों का कहना है कि दावों से ज़्यादा एहमियत उस अमली जद्दोजहद की होती है जो ज़मीन पर नज़र आए। सवाल यह भी है कि चुनावों में जिन मुद्दों का जिक्र हुआ था, क्या उन पर काम हो रहा है?
ख़वातीन की बुलंद मौजूदगी—उम्मीद भी, ज़िम्मेदारी भी
मीटिंग में शहर की मुक़्तलिफ़ तबक़ात से ताल्लुक रखने वाली ख़वातीनो ki शिरकत ने इस बात का सबूत दिया कि समाज में बदलाव की तलब मौजूद है।
लेकिन यही शिरकत अंजुमन पर एक नई ज़िम्मेदारी भी डालती है।
कई ख़वातीन का खुला कहना था :“पहल सराहनीय है, लेकिन पहले अंजुमन अपने अंदरूनी मसाइल पर तवज्जो दे, तभी असली फ़ायदा सामने आएगा।”
बुनियादी सवाल—क्या घर संभाले बग़ैर समाज संवारा जा सकता है?
साफ़ बात यह है कि समाजी तामीर की हर बड़ी कोशिश तब ही कामयाब होती है जब इदारा खुद अंदर से मजबूत हो।
यही वजह है कि शहर में यह सवाल बार-बार गूंज रहा है: क्या अंजुमन पहले अपने घर की इस्लाह करेगी या यह विंग भी सिर्फ़ एक एलान तक महदूद रह जाएगा?
नतीजा
बेशक, अंजुमन रिफअत उन्नीसा का क़ियाम एक क़ाबिल-ए-सिताइश पहल है, लेकिन उसकी कामयाबी का असली इम्तिहान अब शुरू होता है।
उदयपुर शहर की निगाहें टिकी हैं कि—क्या अंजुमन अपने अंदरूनी मसाइल पर क़ाबू पाकर इस कदम को वाक़ई तारीखी बनाएगी, या यह भी सिर्फ़ काग़ज़ी दावे की हद तक सीमित रह जाएगा?
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