
उदयपुर | नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के फैसले ने राजस्थान सहित पूरे देश के छात्र समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। इसी के विरोध में बुधवार को उदयपुर के चेतक सर्कल पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया।
उदयपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया। उन्होंने सीधे तौर पर सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा : “जब पेपर परीक्षा से 3 सप्ताह पहले ही माफिया के हाथों में पहुँच गया, तो इसे केवल ‘चूक’ नहीं बल्कि ‘सिस्टम की बड़ी विफलता’ कहना चाहिए। लाखों बच्चों की साल भर की मेहनत को माफिया के हवाले कर दिया गया।”
किशनगढ़ विधायक डॉ. विकास चौधरी: ‘NEET दोबारा करवाओ, निष्पक्ष परीक्षा दिलवाओ’ के नारों के साथ छात्रों की आवाज बुलंद की।
सीकर का असर: उदयपुर के साथ-साथ सीकर में भी जिलाध्यक्ष सुनीता गठाला के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन हुआ।
मांग: कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है।
कैसे हुआ यह महा-घोटाला? (जांच के मुख्य बिंदु)
जांच एजेंसियों और सीबीआई (CBI) की अब तक की पड़ताल में कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने इस परीक्षा की विश्वसनीयता पर दाग लगा दिया है:
‘गेस पेपर’ की आड़ में खेल: माफिया ने चालाकी दिखाते हुए असली पेपर को ‘गेस पेपर’ बताकर बाजार में फैलाया, ताकि पकड़े जाने पर इसे केवल एक अनुमान बताया जा सके।
हैरान करने वाली समानता: विशेषज्ञों ने पाया कि लीक हुए पेपर के 120 से अधिक सवाल मुख्य परीक्षा के ओरिजनल पेपर से पूरी तरह मेल खाते थे।
प्रिंटिंग प्रेस कनेक्शन : इस पूरे स्कैम का मास्टरमाइंड नासिक (महाराष्ट्र) की एक प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ा बताया जा रहा है। राजस्थान के दिनेश और मांगीलाल जैसे बिचौलियों की गिरफ्तारी के बाद अब सीबीआई अन्य कड़ियों को जोड़ रही है।
उदयपुर में हुए इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि यह मुद्दा अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई और छात्रों के लिए न्याय सुनिश्चित नहीं हुआ, तो यह आंदोलन प्रदेश व्यापी रूप लेगा।
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