गुवाहाटी/नई दिल्ली
असम की राजनीति में उस वक्त उबाल आ गया जब असम बीजेपी के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का एक विवादित एआई-जनरेटेड वीडियो साझा किया गया। हालांकि, चौतरफा आलोचना और कानूनी कार्रवाई की धमक के बाद 8 फरवरी को इस वीडियो को हटा लिया गया, लेकिन इसने राज्य में चुनावी ध्रुवीकरण और ‘हेट स्पीच’ पर नई बहस छेड़ दी है।
क्या था वीडियो में?
करीब 17 सेकंड के इस वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक ‘काउबॉय’ के अवतार में हाथ में राइफल लिए दिखाया गया था। एआई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए वीडियो में दाढ़ी और सफेद टोपी पहने पुरुषों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया। वीडियो में “फॉरेनर फ्री असम”, “नो मर्सी” और “तुम पाकिस्तान क्यों नहीं चले गए?” जैसे बेहद तीखे और भड़काऊ संदेश फ्लैश हो रहे थे। साथ ही, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से मिलती-जुलती शक्ल वाले एक व्यक्ति को भी इसमें दिखाया गया था।
विपक्ष का प्रहार: “यह नरसंहार को उकसावा है”
वीडियो सामने आते ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और एआईएमआईएम ने सरकार पर तीखे हमले किए। कांग्रेस ने इसे “अल्पसंख्यकों की हत्या का महिमामंडन” बताया, वहीं टीएमसी ने इसे ‘राज्य-समर्थित कट्टरपंथीकरण’ करार दिया। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी शिकायत दर्ज कराई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह वीडियो केवल राजनीतिक प्रचार नहीं, बल्कि समाज में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़काने की एक सोची-समझी कोशिश है।
मुख्यमंत्री की सफाई और कड़ा रुख
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि वे हर सोशल मीडिया पोस्ट को व्यक्तिगत रूप से नहीं देखते। हालांकि, उन्होंने अपने इरादे साफ करते हुए कहा, “मैं जेल जाने को तैयार हूँ, लेकिन मैं अपने शब्दों पर कायम हूँ। मैं बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ हूँ और आगे भी रहूँ गा।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे ‘मियां’ मुसलमानों के खिलाफ बोलते रहते हैं क्योंकि वे उन्हें घुसपैठिया मानते हैं।
राजनीतिक मायने: चुनाव और ध्रुवीकरण
असम में विधानसभा चुनाव करीब हैं और जानकारों का मानना है कि यह वीडियो उसी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के अनुसार:
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असुरक्षा की भावना: यह वीडियो सरकार की उस घबराहट को दर्शाता है जहाँ विकास के दावों के बजाय ध्रुवीकरण को जीत का मुख्य आधार बनाया जा रहा है।
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पहचान की राजनीति: मुख्यमंत्री हिंदुत्व और स्वदेशी असमिया पहचान को एक साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
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मियां समुदाय पर निशाना: असम की राजनीति में ‘मियां’ (बंगाली मूल के मुसलमान) शब्द लंबे समय से विवादों में है। इस वीडियो के जरिए उस समुदाय को ‘दुश्मन’ के तौर पर पेश कर मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश की गई है।
भले ही बीजेपी ने वीडियो हटा लिया हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसका संदेश लाखों लोगों तक पहुँच चुका है। चुनावी मौसम में इस तरह की एआई-जनरेटेड सामग्री न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चुनौती दे रही है, बल्कि समाज में मौजूद दरारों को और गहरा करने का काम कर रही है।
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