अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट की आपात बैठक में बड़ा फैसला, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर; कृष्ण मोहन बने कार्यवाहक महासचिव

अयोध्या। अयोध्या स्थित रामलला मंदिर में चढ़ावा चोरी के गंभीर मामले के बीच सोमवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक अहम और आपात बैठक आयोजित की गई। करीब तीन घंटे तक चली इस विशेष बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया गया है। चंपत राय की जगह अब ट्रस्टी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने चढ़ावा चोरी की इस घटना को ‘लज्जाजनक’ और ‘अत्यंत पीड़ादायक’ बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए देश के लाखों-करोड़ों रामभक्तों ने त्याग किया है, ऐसे में इस तरह की घटना सभी को आहत करने वाली है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने तक ट्रस्ट कोई ढिलाई नहीं बरतेगा। मामले की विस्तृत समीक्षा के लिए अब अगली बैठक 22 जुलाई को तय की गई है।

नैतिकता के आधार पर चंपत राय ने छोड़ा पद कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बताया कि महासचिव चंपत राय ने नैतिकता के आधार पर स्वयं पद छोड़ने का निर्णय लिया। चंपत राय का कहना था कि जब तक चोरी के आरोपी गिरफ्तार नहीं हो जाते और उन्हें दंड नहीं मिल जाता, तब तक उनका इस पद पर बने रहना उचित नहीं है। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य और कानूनी विशेषज्ञ के. पाराशरण ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, किसी भी पदाधिकारी का त्यागपत्र मिलते ही उसे स्वीकार करना अनिवार्य प्रावधान है। इसी नियम के तहत चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों के इस्तीफे मंजूर किए गए। ट्रस्ट ने राम मंदिर निर्माण और प्रबंधन में अब तक चंपत राय द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना भी की।

धरोहरें गायब होने की अफवाहों का खंडन सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को ट्रस्ट ने पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि दानपात्र के साथ-साथ मंदिर से कई बहुमूल्य धार्मिक धरोहरें भी गायब हुई हैं। गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के पास रामायण और चरण पादुका समेत करीब 2,800 धार्मिक एवं ऐतिहासिक वस्तुओं का पूरा और विधिवत पंजीकृत रिकॉर्ड सुरक्षित है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो इस रिकॉर्ड को सार्वजनिक भी किया जा सकता है। ट्रस्ट पूरी तरह पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है।

सुरक्षा और प्रबंधन के लिए 3 सदस्यीय समिति गठित भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने और व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए ट्रस्ट ने एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रदीप कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश जी हवारे शामिल हैं। सुरेश जी हवारे के पास शिरडी संस्थान का 10 वर्षों तक सफलतापूर्वक प्रबंधन करने का लंबा अनुभव है। यह समिति मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा के लिए अलग-अलग उम्मीदवारों का इंटरव्यू लेगी और योग्य नामों की सूची ट्रस्ट को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम चयन किया जाएगा।

इसके साथ ही, ट्रस्ट इस मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा करने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

About Author

Leave a Reply