
तेहरान/वाशिंगटन/यरुशलम।
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के भीतर किए गए ताजा हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में क्षेत्र में स्थित अमेरिकी और इजरायली विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। यह युद्ध अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर गया है और इसकी लपटें पड़ोसी देशों तक फैलती जा रही हैं।
ईरान में नागरिक ठिकानों पर हमले
ताजा सैन्य कार्रवाई में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बुशहर प्रांत को निशाना बनाया, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। इसके अतिरिक्त, खुज़ेस्तान प्रांत में एक महत्वपूर्ण जल सुविधा केंद्र पर भी हमला किया गया है। ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर सीधा प्रहार बताया है।
हुती और हिजबुल्लाह का मोर्चा
यमन के हुती विद्रोहियों ने इजरायल पर मिसाइलों और ड्रोनों से दूसरा बड़ा हमला करने का दावा किया है। हुतियों का कहना है कि वे तब तक हमले जारी रखेंगे जब तक इजरायल अपनी “आक्रामकता” नहीं रोकता। वहीं, लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के सफद (Safad) क्षेत्र में स्थित सैन्य ठिकानों पर रॉकेट बरसाए हैं। इजरायली सेना ने पुष्टि की है कि दक्षिणी लेबनान में जारी जमीनी लड़ाई के दौरान उनका एक सैनिक मारा गया है।
यूएई में अलर्ट और वैश्विक बाजार में हलचल
संघर्ष का दायरा बढ़ता देख संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का रक्षा मंत्रालय भी सक्रिय हो गया है। यूएई के हवाई रक्षा तंत्र (Air Defences) ने देश की सीमा में घुस रहे संदिग्ध ड्रोनों और मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने की पुष्टि की है।
इस युद्ध का व्यापक असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है :
शेयर बाजार : दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार (KOSPI) एशिया का सबसे अस्थिर बाजार बन गया है। जहाँ एक ओर डिफेंस कंपनियों के शेयरों में 11% से 44% तक का उछाल देखा गया, वहीं हुंडई जैसी ऑटोमोबाइल कंपनियों के मार्केट वैल्यू में 26% तक की गिरावट आई है।
तेल संकट : ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में व्यवधान के कारण एशिया में तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिका में भारी विरोध प्रदर्शन
अमेरिका के सभी 50 राज्यों में “नो किंग्स” (No Kings) बैनर तले हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध नीतियों और बिना संसदीय मंजूरी के सैन्य हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस युद्ध से न केवल लोकतंत्र को खतरा है, बल्कि अमेरिका में जीवन यापन की लागत और ईंधन की कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
ईरान का रुख : “दुश्मन ने हमें कम आंका”
तेहरान से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी नेतृत्व का मानना है कि उनकी सैन्य शक्ति का गलत आकलन किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि हफ्तों की बमबारी के बावजूद ईरान की मारक क्षमता कम नहीं हुई है और वे लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं।
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