आस्था की पावन पराकाष्ठा : उदयपुर के महापौर पारस सिंघवी ने इंदौर पहुंचकर गुरुदेव सुधा सागर जी महाराज से लिया आशीर्वाद

दीक्षा दिवस के पावन अवसर पर गुरु चरणों में नतमस्तक हुए मेयर पारस सिंघवी; चरण धोकर किया विधिवत पूजन

उदयपुर। जीवन में भौतिक पद और प्रतिष्ठा चाहे कितनी भी ऊंचाइयों को छू लें, लेकिन जब एक सच्चा साधक और जनसेवक अपने गुरु के चरणों में पहुंचता है, तो उसका अहंकार गल जाता है और वह केवल एक विनीत शिष्य बनकर रह जाता है। उदयपुर के नवनियुक्त महापौर पारस सिंघवी की गुरुदेव आचार्य सुधा सागर जी महाराज के प्रति अगाध निष्ठा और श्रद्धा किसी से छिपी नहीं है, शहर के लोग इस बात के साक्षी हैं कि वे गुरुदेव के प्रति किस हद तक समर्पित हैं।

संतुलन, संयम और अध्यात्म के इसी पावन संगम के तहत, गुरुदेव सुधा सागर जी के दीक्षा दिवस के पवित्र अवसर पर महापौर पारस सिंघवी एक दिवसीय प्रवास पर विशेष रूप से इंदौर पहुंचे।

इंदौर पहुंचकर महापौर सिंघवी ने अपनी सारी राजनीतिक व्यस्तताओं को पीछे छोड़ते हुए पूरी तल्लीनता के साथ गुरुदेव के दर्शन किए। दीक्षा दिवस के इस पावन पर्व पर उन्होंने अत्यंत भावुक और श्रद्धावान होकर गुरुदेव के चरण कमलों को अपने हाथों से धोया और विधिवत पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यह दृश्य वहां मौजूद हर श्रद्धालु के लिए हृदय को छू लेने वाला और प्रेरणा से परिपूर्ण था।

मीडिया प्रभारी कृष्णकांत कुमावत ने जानकारी देते हुए बताया कि महापौर सिंघवी ने गुरुदेव से आशीर्वाद लेते हुए उदयपुर शहर के समग्र कल्याण, जनहित और विकास कार्यों के लिए दिव्य मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस आत्मिक क्षण में उनके साथ पूर्व पार्षद राकेश जैन, महावीर, श्रीपाल जैन, संजय गंगावत और कमलेश जैतावत भी मौजूद रहे, जिन्होंने गुरुदेव के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

सौभाग्य और अध्यात्म का अद्भुत क्षण

गुरुदेव के दीक्षा दिवस पर उमड़े श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच, महापौर पारस सिंघवी ने इस पल को अपने जीवन का सबसे सौभाग्यपूर्ण और प्रेरणादायी क्षण बताया। भौतिक दुनिया की चकाचौंध से दूर, जब एक जनप्रतिनिधि संतों के सान्निध्य में पहुंचकर आत्मिक शांति और आशीर्वाद मांगता है, तो वह यह संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व सेवा, समर्पण और संस्कारों की नींव पर ही टिकता है।

 

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