महफ़िल-ए-शायराना: सरज़मीं-ए-उदयपुर पर बिखरा मौसीक़ी का नूर, सूफ़ियाना और शास्त्रीय तानों से रूहानी हुआ समां
“सुरों के साज़ पर जब छिड़ती है तान, रूह झूम उठती है, महक उठता है
“सुरों के साज़ पर जब छिड़ती है तान, रूह झूम उठती है, महक उठता है
उदयपुर। शायराना के संग गूंजा भक्ति रस का इज़हार।27 जुलाई की वो संजीदी दोपहर,जब ऐश्वर्या
उदयपुर। पिछले पंद्रह वर्षों से साहित्य और संगीत की सेवा में संलग्न संस्था शायराना उदयपुर
उदयपुर। सरज़मीं उदयपुर में वो शाम जब सुर, साज़ और शायरी का समंदर लहराया, तो