
उदयपुर। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कॉमर्स कॉलेज में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग को नई दिशा देने की ज़िम्मेदारी अब डॉ. देवेंद्र श्रीमाली के कंधों पर आ गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि सहायक आचार्य डॉ. श्रीमाली को विभागाध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है।
इस नियुक्ति के साथ ही कॉमर्स कॉलेज का यह प्रतिष्ठित विभाग एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। दरअसल, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग का इतिहास ही इतना गौरवशाली रहा है कि हर नए विभागाध्यक्ष के साथ उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाती है।
इस विभाग की पहचान केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि यहां से जुड़े कई प्रोफेसर देशभर में अपने योगदान के लिए जाने जाते हैं। इस कुर्सी पर पहले भी कई नामचीन हस्तियां रह चुकी हैं—राजस्थान सरकार में मंत्री रह चुकीं प्रो. मंजू बाघमार, राजस्थान में कई यूनिवर्सिटीज में वीसी रहे कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी, अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. विजय श्रीमाली, वीएमओयू कोटा के कुलपति प्रो. बी.एल. वर्मा और राजस्थान हायर एजुकेशन काउंसिल के वाइस चेयरमैन प्रो. डी.एस. चुंडावत जैसे दिग्गज शिक्षक इसी पद की गरिमा बढ़ा चुके हैं।
इतना ही नहीं, एनटीपीसी बिजनेस स्कूल की डायरेक्टर प्रो. राजेश्वरी नरेंद्रन भी इस विभाग से जुड़ी रही हैं, जिसने विभाग की साख को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया।
डॉ. देवेंद्र श्रीमाली की नियुक्ति को केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे विभाग की बौद्धिक परंपरा और भविष्य की योजनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। शिक्षण और शोध के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता से उम्मीद की जा रही है कि विभाग नए आयाम हासिल करेगा और छात्रों को आधुनिक बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की दुनिया से जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
About Author
You may also like
-
उदयपुर में फिर सजेगी सुरों की महफ़िल, 6 फरवरी से होने वाले वेदांता उदयपुर वर्ल्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल 2026 का पोस्टर लॉन्च
-
नटराज किड्स प्लैनेट में जोश, जज़्बे और जीत का उत्सव — Vitality 25–26 बना बच्चों के सपनों की उड़ान
-
विश्व कैंसर दिवस : मेरे साथी जिंदादिल पत्रकार, जिसने दर्द से हार नहीं मानी
-
India Demands Immediate Recovery of Vandalized Mahatma Gandhi Statue in Melbourne
-
शिष्टाचार भेंट से आगे : डॉ. लक्षराज सिंह मेवाड़ और पीएम मोदी के बीच बातचीत के राजनीतिक निहितार्थ